tum patang ban ke hawaon men tairti firo | तुम पतंग बन के हवाओं में तैरती फिरो

  - Faheem Jozi
तुमपतंगबनकेहवाओंमेंतैरतीफिरो
औरडोरमिरेहाथोंकोकाटतीरहे
परपरज़ख़्मीऔरआँखेंतेरेरंगोंमेंउलझीरहें
लहूबहतारहे
औरआसतुझेचाहनेकी
आसमानबनकेतिरेचारोंतरफ़बिखरजाए
शामउतरेतोतेरीआँखोंकारंग
मुझेअपनीपनाहमेंसमेटले
औरतेरीराहोंपरमेराइकइकलम्सबिखेरदे
तेरीराहोंकाकुछपतातोहोगा
औरतेरेवक़्तकीकोईमंज़िलतोहोगीजान
(२)
एकमैंतन्हाएकवोतन्हा
एकवोजिससेमैंतुम्हारीकथाकहताहूँ
एकवोजोकिसीकीकथासेमुझमेंज़िंदा
औरतुमतन्हा
लोयेभीकोईबातहुईतुमनेकहा
हाँयेबातेंऔरइनबातोंकेनुकीलेकुंगरे
जबतेरीजानमेंअटकतेहैं
तोतुम्हारेनाख़ुनोंमेंऐसीशफ़क़दहकतीहै
जोसुनसकेकुछकहसके
तबमेरीउमंगोंपरइकआगलहरातीहै
औरमैंतुझेउनख़ुद-रौजंगलीफूलोंसेतश्बीहदेताहूँ
जोसिर्फ़अपनीवहशतमेंज़िंदारहतेहैं
(३)
ज़ख़्मखुलगएहैंजानाँ
औरहवाएँचारोंतरफ़सेउमडीपड़ीहैं
  - Faheem Jozi
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