shaam KHaamosh hai pedon pe ujaala kam hai | शाम ख़ामोश है पेड़ों पे उजाला कम है

  - Faheem Jogapuri
शामख़ामोशहैपेड़ोंपेउजालाकमहै
लौटआएहैंसभीएकपरिंदाकमहै
देखकरसूखगयाकैसेबदनकापानी
मैंकहताथामिरीप्याससेदरियाकमहै
ख़ुदसेमिलनेकीकभीगाँवमेंफ़ुर्सतमिली
शहरआएहैंयहाँमिलना-मिलानाकमहै
आजक्यूँँआँखोंमेंपहलेसेनहींहैंआँसू
आजक्याबातहैक्यूँँमौजमेंदरियाकमहै
अपनेमेहमानकोपलकोंपेबिठालेतीहै
मुफ़्लिसीजानतीहैघरमैंबिछौनाकमहै
बसयहीसोचकेकरनेलगेहिजरतआँसू
अपनीलाशोंकेमुक़ाबिलयहाँकांधाकमहै
दिलकीहरबातज़बाँपरनहींआतीहै'फहीम'
मैंनेसोचाहैज़ियादाउसेलिक्खाकमहै
  - Faheem Jogapuri
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