beesvi sadi ke aakhiri barson men | बीसवीं सदी के आख़िरी बरसों में

  - Ekram Khawar
बीसवींसदीकेआख़िरीबरसोंमें
एकगहरातीहुईशामको
जबपरिंदोंऔरपत्तोंकारंगसियाहहोचुकाथा
औरदुखकारंगहररंगपरग़ालिबथा
माँटूटचुकीथी
महबूबारूठचुकीथी
हफ़्ता-वारतातीलकीफ़राग़तसेमुतमइन
सरशारीकेएकलम्हेकोबे-क़रार
शाइ'र
लिखनेबैठा
गिर्द-ओ-पेशकीदुनिया
निहायतआहिस्तगीसे
ख़फ़ीफ़पर्दोंसेछनतीहुई
ग़ाएबहोगई
औरपूरीकाएनातमहदूदहोकर
मेज़केरक़्बेमेंसिमटआई
शाइ'रना-मालूमकितनेज़मानोंतक
महबूतबैठाफ़ज़ाकीसरगोशियाँसुनतारहा
साएँसाएँकरतीख़ामोशीमें
मो'तबरअल्फ़ाज़कीतलाश-ओ-जुस्तुजूमें
ग़लताँ-व-पेचाँ
कियकलख़्तरातकीशह-रगसे
कईख़ूनकेफ़व्वारेछूटे
औरसिसकतीसीढ़ियोंचीख़तेदरवाज़ोंकेआहंगपे
मेज़परपड़ीकाँचसेझाँकती
मार्क्सकीतस्वीरोंपर
इक-ताराबजातेहुएनेपालीबच्चेकीतस्वीर
औरपाशकीनज़्मोंपर
मूसला-धारआँसुओंकीबारिशहोनेलगी
औरबाहररातकीतारीकीमेंकुत्तेभौंकनेलगे
नसीबोंजलीबाँकीतिलँगनरातजारीथी
  - Ekram Khawar
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy