taptee zameen pe paanv na dhar ab bhi laut ja | तपती ज़मीं पे पाँव न धर अब भी लौट जा

  - Ejaz Rahi
तपतीज़मींपेपाँवधरअबभीलौटजा
क्यूँँहोरहाहैख़ाक-ब-सरअबभीलौटजा
अबतकखुलेहुएहैंसदाक़तकेरास्ते
बंदहोजाएँवक़्तकेदरअबभीलौटजा
इतरातूनविश्ता-ए-दीवारपढ़भीले
दार-ओ-रसनकीबातकरअबभीलौटजा
आँखोंकेबादबानसेवीरानियाँभीदेख
किसदर्जालुटचुकाहैयेघरअबभीलौटजा
'राही'अभीतोशामकीसुर्ख़ीबुझीनहीं
ज़िदकरलैत-ओ-ल'अलकरअबभीलौटजा
  - Ejaz Rahi
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