shab-e-wa'da andhera chha gaya kya tum na aaoge | शब-ए-वा'दा अँधेरा छा गया क्या तुम न आओगे

  - Ejaz Quraishi
शब-ए-वा'दाअँधेराछागयाक्यातुमआओगे
फ़लकपरचाँदभीकजलागयाक्यातुमआओगे
तुम्हाराहिज्रआफ़तढागयाक्यातुमआओगे
हमारादिलबहुतघबरागयाक्यातुमआओगे
चमनमेंहरतरफ़गुलहा-ए-रंगींमुस्कुराउठे
बहारोंकाज़मानागयाक्यातुमआओगे
हमारीजानपरबनआतीहैदौर-ए-मोहब्बतमें
जुनून-ए-दिलक़यामतढागयाक्यातुमआओगे
कहाँतकइंतिज़ार-ए-जल्वामेंतड़पेंमिरीआँखें
दिल-ए-बेताबअबघबरागयाक्यातुमआओगे
मरीज़-ए-दर्द-ओ-ग़मपरनज़्अ'काआलमहुआतारी
सर-ए-बालींज़मानागयाक्यातुमआओगे
सर-ए-मय-ख़ानाइकदुनियाचलीआतीहैपीनेको
वोदेखोमस्तबादलछागयाक्यातुमआओगे
दम-ए-आख़िरथींकुछऔरबातेंउसकेहोंटोंपर
मरीज़-ए-ग़मयहीकहतारहाक्यातुमआओगे
तुम्हारीयादमें'एजाज़'अपनेहोशखोबैठा
उसेतन्हाईकाग़मखागयाक्यातुमआओगे
  - Ejaz Quraishi
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