ye samundar | ये समुंदर

  - Ejaz Farooqi
येसमुंदर
मौज-दर-मौजसलासिल
हल्केगहरेसब्ज़नीलेरंग
जिनपरजा-ब-जाचाँदीकेधब्बे
उसकिनारेपरगुलाबीरंगमेंडूबाहुआइकगोलचेहरा
फैलतेपानीमेंअपनेआतिशींहोंटोंकीसुर्ख़ीघोलताजाए
मैंइकसोनेकीकश्तीमेंसवार
उनहसींरंगोंमेंमदहोश
उसकिनारेकीतरफ़बढ़ताचलाजाताहूँ
दूरसत्ह-ए-आबपरवोएकबगलोंकीक़तार
येसमुंदरकेऋषीज्ञानी
जोपानीकेहरइकसुर-तालसेआगाहहैं
अबतकयेबे-फ़िक्रीसेमौजोंपरसवार
तैरतेजातेथे
क्यूँँफिरदफ़अ'तन
टोलीबनाकरउड़गए
मैंनज़रकेतारपररक़्साँ
वोनग़्मोंकेसुरोंमेंगुम
  - Ejaz Farooqi
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