hifz-e-gul ke li.e rakhte jo nigahbaan kuchh aur | हिफ़्ज़-ए-गुल के लिए रखते जो निगहबाँ कुछ और

  - Ehsan Ali Khan
हिफ़्ज़-ए-गुलकेलिएरखतेजोनिगहबाँकुछऔर
होगयाफूलोंसेमहरूमगुलिस्ताँकुछऔर
लुटकेसह
मेंहुएपौदोंनेयेसरगोशीकी
अबनिगहबानोंपेरक्खेंगेनिगहबाँकुछऔर
शहर-ए-दिलकुछतोसजालेंकिभरमरहजाए
हुस्न-ए-फ़ातेहकोहैंताराजकेअरमाँकुछऔर
वक़्तहरसाँसकेबदलेमेंपसीनामाँगे
दिलयेचाहेकिहोआसानभीआसाँकुछऔर
शहरसफिरकोईवहशीइधरआयाशायद
आजसहरामेंहैंअंदाज़-ए-ग़ज़ालाँकुछऔर
जिनकोमश्शातगी-ए-ज़ुल्फ़कादा'वाथाबहुत
करगएगेसू-ए-गेतीवोपरेशाँकुछऔर
फिरकभीहोकिहोमिलनेकीसूरतपैदा
चंदसाअ'तहीचलेमहफ़िल-ए-याराँकुछऔर
कुछहोनेपेबहुतकुछहैमुयस्सर'अहसन'
काशहोतेतिरेमामूरेमेंइंसाँकुछऔर
  - Ehsan Ali Khan
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