kuchh zaada hi apnon se ghir raha hooñ | कुछ ज़ादा ही अपनों से घिर रहा हूँ

  - Yuvraj Dutt
कुछज़ादाहीअपनोंसेघिररहाहूँ
मुझेअकेलाछोड़दो
अकेलाहूँऔरकहताफिररहाहूँ
मुझेअकेलाछोड़दो
हरपरिंदाघोंसलेकाखाबनहींदेखता
यहसफ़रबिनहमसेफ़रकेहीसही
मुझेचिढ़होतीहै,मुझेमतबुलाओ
मानातुमलोगमेरेघरकेहीसही
तुमकहतेहोकेमैंयहअबकहरहाहूँ
परअकेलारहनापाऊँगा
परमैंअपनेफ़ैसलोंपेस्थिररहाहूँ
जानताहूँकिसकुँएमेंगिररहाहूँ
मुझेअकेलाछोड़दो
अकेलाहूँऔरकहताफिररहाहूँ
मुझेअकेलाछोड़दो
  - Yuvraj Dutt
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