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Divy Kamaldhwaj
nahin lagta kahii bhi dil hamaara
nahin lagta kahii bhi dil hamaara | नहीं लगता कहीं भी दिल हमारा
- Divy Kamaldhwaj
नहीं
लगता
कहीं
भी
दिल
हमारा
सभी
को
आज़माते
फिर
रहे
हैं
- Divy Kamaldhwaj
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तुम्हें
इक
मश्वरा
दूँ
सादगी
से
कह
दो
दिल
की
बात
बहुत
तैयारियाँ
करने
में
गाड़ी
छूट
जाती
है
Zubair Ali Tabish
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हम
मिल
के
आ
गए
मगर
अच्छा
नहीं
लगा
फिर
यूँँ
हुआ
असर
कि
घर
अच्छा
नहीं
लगा
इक
बार
दिल
में
तुझ
सेे
जुदाई
का
डर
बना
फिर
दूसरा
कोई
भी
डर
अच्छा
नहीं
लगा
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Shriyansh Qaabiz
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मैं
जब
सो
जाऊँ
इन
आँखों
पे
अपने
होंट
रख
देना
यक़ीं
आ
जाएगा
पलकों
तले
भी
दिल
धड़कता
है
Bashir Badr
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झुकी
झुकी
सी
नज़र
बे-क़रार
है
कि
नहीं
दबा
दबा
सा
सही
दिल
में
प्यार
है
कि
नहीं
Kaifi Azmi
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अगर
हमारे
ही
दिल
में
ठिकाना
चाहिए
था
तो
फिर
तुझे
ज़रा
पहले
बताना
चाहिए
था
Shakeel Jamali
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हर
धड़कते
पत्थर
को
लोग
दिल
समझते
हैं
'उम्रें
बीत
जाती
हैं
दिल
को
दिल
बनाने
में
Bashir Badr
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इतनी
सारी
यादों
के
होते
भी
जब
दिल
में
वीरानी
होती
है
तो
हैरानी
होती
है
Afzal Khan
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कहानी
भी
नहीं
है
दिल
में
कोई
सो
कुछ
भी
इन
दिनों
अच्छा
नहीं
है
मैं
अब
उकता
गया
हूँ
ज़िन्दगी
से
मेरा
जी
अब
कहीं
लगता
नहीं
है
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Ritesh Rajwada
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नहीं
ये
फ़िक्र
कोई
रहबर-ए-कामिल
नहीं
मिलता
कोई
दुनिया
में
मानूस-ए-मिज़ाज-ए-दिल
नहीं
मिलता
Asrar Ul Haq Majaz
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हम
को
किस
के
ग़म
ने
मारा
ये
कहानी
फिर
सही
किस
ने
तोड़ा
दिल
हमारा
ये
कहानी
फिर
सही
Masroor Anwar
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इस
रण
में
जय
और
पराजय
मेरी
है
तू
गाण्डीव
उठा,
कर
हमला
आगे
बढ़
Divy Kamaldhwaj
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दर्द
सहने
का
हुनर
तो
पास
सबके
है
मगर
दर्द
कहने
का
हुनर
बस
शायरों
के
पास
है
Divy Kamaldhwaj
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क़ुदरत
ने
कितने
रंग
मिलाएँ
हैं
साथ
साथ
गुलशन
के
फ़ूल
ऐसे
बनाएँ
हैं
साथ
साथ
केवल
जले
नहीं
हैं
वो
पन्ने
क़िताब
के
नफरत
ने
फूल
भी
तो
जलाएँ
हैं
साथ
साथ
ये
काम
महज़
आग
कभी
कर
न
पाएगी
सबको
पता
ही
है
के
हवाएँ
हैं
साथ
साथ
ये
बात
और
है
कि
वो
रिश्ता
नहीं
बचा
वरना
बहुत
से
राज़
छुपाएँ
हैं
साथ
साथ
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Divy Kamaldhwaj
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मेरे
भीतर
नहीं
लिखने
की
तड़पन
है
तड़पन,
इसलिए
मैं
लिख
रहा
हूँ
Divy Kamaldhwaj
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देश
मेरा
जंग
तो
जीता
मगर
लौट
कर
आया
नहीं
बेटा
मेरा
Divy Kamaldhwaj
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