न बने मुझ सेे भी माक़ूल जवाबात कभी

  - divya 'sabaa'
बनेमुझसेेभीमाक़ूलजवाबातकभी
गएउसकीनज़रसेभीसवालातकभी
मुझकोकिसशयकीतलबहैमैंबताभीसकी
औरक़िस्मतनेभीसमझीमिरीबातकभी
नींदमेंभीनिकलआतेहैंअचानकआँसू
जागजातेहैंअगरख़्वाबमेंजज़्बातकभी
कुछतोहैदिलकोजोबेचैनकिएजाताहै
इसतरहदर्दमेंकटतेथेदिन-रातकभी
जिसपेकरदिल-ए-मुज़्तरकोक़रारजाए
हिजरतोंमेंनहींआतेवोमुक़ामातकभी
कैसेबनतीमैंभलाअहल-ए-जहाँकेजैसी
उसकेमेयारपेउतरीमिरीज़ातकभी
बज़्म-ए-अग़्यारमेंजानेकामुझेशौक़नहीं
औरमिलतेनहींअपनोंसेख़यालातकभी
अपनेबारेमेंबताऊँभीतोकैसेकि'सबा'
ख़ुदसेहोतीहीनहींमेरीमुलाक़ातकभी
  - divya 'sabaa'
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