इश्क़ को मो'जिज़ा समझते हो

  - divya 'sabaa'
इश्क़कोमो'जिज़ासमझतेहो
कैसेनादाँहोक्यासमझतेहो
अपनीज़िदकाहैतुमकोपासबहुत
औरमेरीअनासमझतेहो
हसरतोंकेवोचारआँसूहैं
जिनकोतुमनक़्श-ए-पासमझतेहो
दर्द-ए-दिलकोदवाहैख़ुदअपनी
तुमइसेला-दवासमझतेहो
राह-ए-उल्फ़तमेंज़िन्दगानीके
लुटगयाक़ाफ़िलासमझतेहो
दिल-लगीतोनहींयेदिलकीलगी
आगसेखेलनासमझतेहो
रंज-ओ-ग़मयास-ओ-हसरत-ओ-हिरमाँ
रस्म-ओ-राह-ए-वफ़ासमझतेहो
वोतोख़ुदकीभीहोसकीकभी
जिसकोअपनी'सबा'समझतेहो
  - divya 'sabaa'
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