is sheher-e-nigaaraan ki kuchh baat niraali hai | इस शहर-ए-निगाराँ की कुछ बात निराली है

  - Divakar Rahi
इसशहर-ए-निगाराँकीकुछबातनिरालीहै
हरहाथमेंदौलतहैहरआँखसवालीहै
शायदग़म-ए-दौराँकामाराकोईजाए
इसवास्तेसाग़रमेंथोड़ीसीबचालीहै
हमलोगोंसेयेदुनियाबदलीगईलेकिन
हमनेनईदुनियाकीबुनियादतोडालीहै
उसआँखसेतुमख़ुदकोकिसतरहछुपाओगे
जोआँखपस-ए-पर्दाभीदेखनेवालीहै
जबग़ौरसेदेखीहैतस्वीरतिरीमैंने
महसूसहुआजैसेअबबोलनेवालीहै
दुनियाजिसेकहतीहैबे-राह-रवी'राही'
जीनेकेलिएहमनेवोराहनिकालीहै
  - Divakar Rahi
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