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Dipendra Singh 'Raaz'
lagta hai usne maan li hai ab badon ki baat
lagta hai usne maan li hai ab badon ki baat | लगता है उसने मान ली है अब बड़ों की बात
- Dipendra Singh 'Raaz'
लगता
है
उसने
मान
ली
है
अब
बड़ों
की
बात
मेरी
मज़ार
पर
नहीं
आती
वो
आजकल
- Dipendra Singh 'Raaz'
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मुझे
अँधेरे
से
बात
करनी
है
सो
करा
दो,
दिया
बुझा
दो
कुछ
एक
लम्हों
को
रौशनी
का
गला
दबा
दो,
दिया
बुझा
दो
रिवाज़-ए-महफ़िल
निभा
रहा
हूँ
बता
रहा
हूँ
मैं
जा
रहा
हूँ
मुझे
विदा
दो,
जो
रोना
चाहे
उन्हें
बुला
दो,
दिया
बुझा
दो
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Vikram Gaur Vairagi
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हमको
तो
प्यार
चाहिए
था
तेरा
प्यार
सिर्फ़
इस
बात
से
वफ़ा
का
कोई
वास्ता
नहीं
Vikas Rajput
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मिले
तो
कुछ
बात
भी
करोगे
कि
बस
उसे
देखते
रहोगे
Shariq Kaifi
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सोच
समझ
कर
देख
लिया
है
क्या
बोलूँ
तुझ
को
तो
हर
बात
बुरी
लग
जाती
है
Sohil Barelvi
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कुछ
बात
है
कि
हस्ती
मिटती
नहीं
हमारी
सदियों
रहा
है
दुश्मन
दौर-ए-ज़माँ
हमारा
Allama Iqbal
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जब
मसअले
न
हल
हो
सकें
बात-चीत
से
फिर
जंग
ही
लड़ो
कि
ज़माना
ख़राब
है
shaan manral
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उसे
किसी
से
मोहब्बत
थी
और
वो
मैं
नहीं
था
ये
बात
मुझ
सेे
ज़ियादा
उसे
रुलाती
थी
Ali Zaryoun
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वक़्त,
वफ़ा,
हक़,
आँसू,
शिकवे
जाने
क्या
क्या
माँग
रहे
थे
एक
सहूलत
के
रिश्ते
से
हम
ही
ज़्यादा
माँग
रहे
थे
उसकी
आँखें
उसकी
बातें
उसके
लब
वो
चेहरा
उसका
हम
उसकी
हर
एक
अदास
अपना
हिस्सा
माँग
रहे
थे
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Shikha Pachouly
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बात
ऐसी
भी
भला
आप
में
क्या
रक्खी
है
इक
दिवाने
ने
ज़मीं
सर
पे
उठा
रक्खी
है
इत्तिफ़ाक़न
कहीं
मिल
जाए
तो
कहना
उस
सेे
तेरे
शाइर
ने
बड़ी
धूम
मचा
रक्खी
है
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Ismail Raaz
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भीगी
पलकें
देख
कर
तू
क्यूँँ
रुका
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
तो
मेरी
आँख
में
कुछ
आ
गया
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
किसी
के
साथ
ख़ुश
था
कितने
दुख
की
बात
थी
अब
मेरे
पहलू
में
आकर
रो
रहा
है
ख़ुश
हूँ
मैं
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Zubair Ali Tabish
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मुझे
है
इश्क़
जिस
सेे
इक
सदी
से
उसे
भी
इश्क़
है
पर
और
किसी
से
नज़र
आती
नहीं
मुझको
कहीं
पर
लिपट
जाता
वगरना
मैं
ख़ुशी
से
मुझे
है
इल्म
मेरी
ज़िन्दगी
ही
जुदा
कर
देगी
मुझको
ज़िन्दगी
से
कमी
कोई
नहीं
मुझको
तो
यूँंँ
पर
मुझे
है
हर
कमी
बस
इक
कमी
से
कभी
रोते
नहीं
हम
ग़म
में
अपने
कभी
हंँसते
नहीं
हम
गुदगुदी
से
कि
अब
के
दरमियाँ
झगड़े
न
लाओ
जुदा
हो
जाओ
अब
के
ख़ामोशी
से
मुझे
डर
है
कोई
पूछे
न
मुझ
को
तुम्हें
भी
है
मोहब्बत
क्या
किसी
से
बिछड़ते
वक़्त
उस
सेे
ये
दु'आ
की
कभी
कोई
न
यूँंँ
बिछड़े
किसी
से
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Dipendra Singh 'Raaz'
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तुम्हें
ये
सुर्ख़
आँखें
शब
तलक
सहरा
लगेगी
यही
आँखें
तुम्हें
फिर
नीम
शब
दरिया
लगेगी
जिसे
हम
चाहते
थे
कुछ
नहीं
लगते
थे
उसके
हमें
जो
चाहती
है
वो
हमारी
क्या
लगेगी
उसे
मालूम
है
मैं
मान
जाऊँगा
दुबारा
मुझे
मालूम
है
वो
फिर
गले
से
आ
लगेगी
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Dipendra Singh 'Raaz'
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जब
किया
इज़हार
तो
हंँस
कर
मुझे
कहने
लगी
प्यार
से
दो
बात
करना
प्यार
हो
जाता
है
क्या
Dipendra Singh 'Raaz'
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जब
वो
कुछ
देर
याद
आता
है
ग़म
पे
फिर
शे'र
याद
आता
है
पहले
आती
है
याद
उसकी
फिर
मुझको
अजमेर
याद
आता
है
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Dipendra Singh 'Raaz'
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"ठीक
हूँ
मैं"
बोलता
हूँ
मैं
मगर
सच
कहूँ
तो
ठीक
तो
कुछ
भी
नहीं
Dipendra Singh 'Raaz'
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