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DILBAR
khala men jo dikhaaya hai bayaañ vo kar nahin saktaa
khala men jo dikhaaya hai bayaañ vo kar nahin saktaa | ख़ला में जो दिखाया है बयाँ वो कर नहीं सकता
- DILBAR
ख़ला
में
जो
दिखाया
है
बयाँ
वो
कर
नहीं
सकता
गुरु
के
बिन
जगह
ख़ाली
कोई
भी
भर
नहीं
सकता
- DILBAR
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कभी
इक
दिन
बजेंगी
तालियाँ
यूँँ
नाम
पर
मेरे
करेगी
नाज़
दुनिया
ये
किए
हर
काम
पर
मेरे
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फ़ज़ा
में
ज़हर
नफ़रत
का
घुला
है
बड़ा
मुश्किल
यहाँ
जीना
हुआ
है
जिसे
समझा
था
अपनों
से
भी
बढ़कर
बगल
में
उसके
ही
ख़ंजर
मिला
है
भला
मंज़िल
को
कैसे
पाएगा
वो
सफ़र
पर
जो
नहीं
अब
तक
चला
है
भरोसा
जिसको
है
अपने
नबी
पर
करे
हर
बात
पर
वो
शुक्रिया
है
ख़ुदा
का
नूर
सब
में
देख
दिलबर
लगेगा
हर
कोई
अपना
सगा
है
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जहाँ
में
नेकी
का
पुतला
गिराया
जा
नहीं
सकता
बुराई
को
बिना
उल्फ़त
मिटाया
जा
नहीं
सकता
इनायत
हो
नबी
की
तो
जले
रावण
मैं
का
वरना
अना
के
तीर
से
इसको
जलाया
जा
नहीं
सकता
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अगर
शिकवा
इबादत
मैं
अभी
भी
कर
रहा
हूॅं
तो
मानो
टूटे
बर्तन
में
मैं
पानी
भर
रहा
हूॅं
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किया
मुझ
पे
है
ये
एहसान
मौला
दिया
जो
ये
इलाही
ज्ञान
मौला
था
जिस
भी
काम
से
आया
जहाँ
में
बशर
उस
काम
से
अनजान
मौला
जगाकर
इश्क़
आदम
के
भी
मन
में
बनाता
है
उसे
इंसान
मौला
तेरी
हर
रम्ज़
को
मैं
मान
पाऊँ
अता
कर
मुझको
वो
वरदान
मौला
ज़रा
सी
भी
न
जिस
में
कामना
हो
करूँँ
सेवा
लगा
जी
जान
मौला
भँवर
में
भी
उसे
मिल
जाए
मंज़िल
तू
जिस
कश्ती
का
हो
कप्तान
मौला
हक़ीक़त
छोड़
मुझ
सेे
ख़्वाब
में
भी
किसी
का
भी
न
हो
अपमान
मौला
तेरे
रहम-ओ-करम
से
आज
'दिलबर'
मिली
हर
क़ैद
से
गुफ़रान
मौला
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