daavaton men shaayri ab ho gaii hai rasm-e-aam | दावतों में शा'इरी अब हो गई है रस्म-ए-आम

  - Dilawar Figar
दावतोंमेंशा'इरीअबहोगईहैरस्म-ए-आम
यूँँंभीशाइरसेलियाजाताहैअक्सरइंतिक़ाम
पहलेखानाउसकोखिलवातेहैंभूकेकीतरह
फिरउसेकरतेहैंइस्तिमालमीठेकीतरह
सुनिएइकसाहबकाक़िस्साजोबड़ेफ़नकारहैं
हाँमगरथोड़ेसेदावतख़ोरदुनियादारहैं
एकदावतमेंउन्हेंगानाभीथाखानेकेबाद
''वोतिरेआनेसेपहलेयेतिरेजानेकेबाद''
शायर-ए-मौसूफ़थेइसफ़ील्डमेंबिल्कुलनए
इसलिएवोकुछज़रूरतसेज़ियादाखागए
क़ोरमाइस्टूपसंदा,कोफ़ता,शामीकबाब
जानेक्या-क्याखागयायेशाएर-ए-मेअदा-ख़राब
कुछपूछोइसअमलसेउनकोक्याहासिलहुआ
उनकेमाज़ीसेजुदाख़ुदउनकामुस्तक़बिलहुआ
शे'रपढ़नेकेलिएमौसूफ़जबमसनदपरआए
ज़ोरतोपूरालगाडालामगरकुछपढ़पाए
चाहतेयेथेमैंकुछहाल-ए-दिल-ए-रूदाद-ए-ग़म
मुँहसेसिर्फ़इतनाहीनिकलामम्मा-मम्मा-मम्मा-मम
देखकरउनकीयेहालतइकअदीब-ए-ज़िंदा-दिल
उनसेयेकहनेलगाबेवक़ूफ़-ए-मुस्तक़िल
केबज़्म-ए-शेरमेंशर्त-ए-वफ़ापूरीतोकर
जितनाखानाखागयाहैउतनीमज़दूरीतोकर
बाद-ए-शेर-ओ-शाएरीखानेकारखिएइंतिज़ाम
येग़लतदस्तूरहैपहलेतआमऔरफिरकलाम
येहोगातोअदबज़ेर-ए-ज़मींगड़जाएगा
ख़ुश-गुलूशाइरतोखानाखाकेठसपड़जाएगा
  - Dilawar Figar
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