haseen hai shahar to ujlat men kyun guzar jaayen | हसीं है शहर तो उजलत में क्यूँँ गुज़र जाएँ

  - Dil Ayubi
हसींहैशहरतोउजलतमेंक्यूँँगुज़रजाएँ
जुनून-ए-शौक़उसेभीनिहालकरजाएँ
येऔरबातकिहमकोनज़रनहींआए
मगरवोसाथहीरहताहैहमजिधरजाएँ
हयात-ए-इश्क़कामक़्सूदबनगईआख़िर
येआरज़ूकितिरानामलेकेमरजाएँ
येराह-ए-इश्क़हैआख़िरकोईमज़ाक़नहीं
सऊबतोंसेजोघबरागएहोंघरजाएँ
पहुँचकेमंज़िल-ए-मक़्सूदपरहीदमलेंगे
किचलपड़ेहैंतोकिसमुँहसेलौटकरजाएँ
  - Dil Ayubi
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