subah ki peshaani par | सुब्ह की पेशानी पर

  - KAPIL DEV
सुब्हकीपेशानीपर
कियागयादस्तख़तहैकोहरा,
जनवरीकीकिताबमें
नाजानेकितनेदस्तख़त
किएहैंसर्दीने।
तुम्हारेख़यालोंकीधूप
ओढ़करमैं
जनवरीकीयेसर्दकिताब
पढ़ताहूँ।
  - KAPIL DEV
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