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Deepak Sharma Deep
bahut giryaa karogi jaante hain
bahut giryaa karogi jaante hain | बहुत गिर्या करोगी जानते हैं
- Deepak Sharma Deep
बहुत
गिर्या
करोगी
जानते
हैं
हमें
तुम
क्या
कहोगी
जानते
हैं
हमारी
ही
बुरी
लगती
थी
तुम
को
अभी
सब
की
सुनोगी
जानते
हैं
अभी
तो
फ़ासलों
के
लुत्फ़
लूटो
कभी
सर
भी
धुनोगी
जानते
हैं
हमारी
तो
कटेगी
कश्मकश
में
चहक
तुम
भी
उठोगी
जानते
हैं
बहा
कर
अश्क
सारी
रात
गोया
कि
सुब्ह
हँस
कर
मिलोगी
जानते
हैं
चली
आना
अकेला-पन
लगे
तो
कहाँ
कब
तक
रहोगी
जानते
हैं
- Deepak Sharma Deep
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ये
मुझे
नींद
में
चलने
की
जो
बीमारी
है
मुझ
को
इक
ख़्वाब-सरा
अपनी
तरफ़
खींचती
है
Shahid Zaki
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मेहरबाँ
हम
पे
हर
इक
रात
हुआ
करती
थी
आँख
लगते
ही
मुलाक़ात
हुआ
करती
थी
हिज्र
की
रात
है
और
आँख
में
आँसू
भी
नहीं
ऐसे
मौसम
में
तो
बरसात
हुआ
करती
थी
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Ismail Raaz
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क्या
बैठ
जाएँ
आन
के
नज़दीक
आप
के
बस
रात
काटनी
है
हमें
आग
ताप
के
कहिए
तो
आप
को
भी
पहन
कर
मैं
देख
लूँ
मा'शूक़
यूँँ
तो
हैं
ही
नहीं
मेरी
नाप
के
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Farhat Ehsaas
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तुम्हारा
ख़्वाब
भी
आए
तो
नींद
पूरी
हो
मैं
सो
तो
जाऊँगा
नींद
आने
की
दवा
लेकर
Swapnil Tiwari
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तेरे
बिन
घड़ियाँ
गिनी
हैं
रात
दिन
नौ
बरस
ग्यारह
महीने
सात
दिन
Rehman Faris
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दिन
ढल
गया
और
रात
गुज़रने
की
आस
में
सूरज
नदी
में
डूब
गया,
हम
गिलास
में
Rahat Indori
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ठंडी
चाय
की
प्याली
पी
के
रात
की
प्यास
बुझाई
है
Rais Farog
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ईद
के
रोज़
यही
अपनी
दु'आ
है
रब
से
मुल्क
में
अमन
का,
उलफ़त
का
बसेरा
हो
जाए
हर
परेशानी
से
हर
शख़्स
को
मिल
जाए
नजात
इस
सियह
रात
का
बस
जल्द
सवेरा
हो
जाए
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Zaki Azmi
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चाँद
तारे
इक
दिया
और
रात
का
कोमल
बदन
सुब्ह-दम
बिखरे
पड़े
थे
चार
सू
मेरी
तरह
Aziz Nabeel
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इन्हीं
ग़म
की
घटाओं
से
ख़ुशी
का
चाँद
निकलेगा
अँधेरी
रात
के
पर्दे
में
दिन
की
रौशनी
भी
है
Akhtar Shirani
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हमारी
जान
तुम
ऐसा
करोगी
हमारी
जान
का
सौदा
करोगी
तभी
ये
दिल
तुम्हें
देंगे
बताओ
ज़रा
सी
बात
पर
रूठा
करोगी
चलो
तकिया
तुम्हारे
ही
सिरहाने
वगरना
रात-भर
झगड़ा
करोगी
हमें
बद-मआ'श
कह
कर
मार
दोगी
कहेंगे
हम
अगर
बोसा
करोगी
अजी
हम
जानते
हैं
के
मिरी
जाँ
करोगी
जो
बहुत
अच्छा
करोगी
निगाहों
से
निगाहों
को
पकड़
कर
लबों
से
हाए
उफ़
तौबा
करोगी
अरे
शरमा
रही
हो
क्यूँँ
कहो
भी
नहा
कर
हाए
क्या
पहना
करोगी
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Deepak Sharma Deep
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याद
करने
से
पहले
भुलाना
पड़ा
ये
ज़हर
था
मगर
आज़माना
पड़ा
जान
कर
भी
के
है
तीरगी
बद
बुरी
जान
कर
भी
इसे
गुदगुदाना
पड़ा
राहबर
के
ज़ेहन
को
समझने
हमें
राहज़न
के
मोहल्ले
में
जाना
पड़ा
अब
हँसी
आ
रही
है
कि
किस
के
लिए
हाए
किस
के
लिए
मार
खाना
पड़ा
आप
तो
सर
टिका
कर
के
चलते
बने
और
यूँँ
ही
रहा
फिर
ये
शाना
पड़ा
ज़िंदगी
ज़िंदगी
ज़िंदगी
ज़िंदगी
इस
बुरी
नज़्म
को
गुनगुनाना
पड़ा
दोज़ख़ी
में
रुलाई
तो
लिक्खी
ही
थी
पर
ग़ज़ब
ये
हुआ
मुस्कुराना
पड़ा
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Deepak Sharma Deep
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ज़िंदगी
मो'तबर
तलाशे
है
वो
खंडर
में
गुहर
तलाशे
है
देख
वो
ऊबने
लगा
मुझ
से
और
कोई
सफ़र
तलाशे
है
दाग़
को
दे
गया
मिरी
सूरत
सूरते-नौ
शजर
तलाशे
है
एक
मैं
पा
के
बेच
आया
हूँ
एक
तू
दर-ब-दर
तलाशे
है
'दीप'
जैसे
कई
लुटे
उस
से
वो
अभी
नामवर
तलाशे
है
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Deepak Sharma Deep
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मोहब्बत
में
यही
झगड़ा
करोगे
करो
इस
के
अलावा
क्या
करोगे
इधर
हम
भी
कलाई
काट
लेंगे
उधर
तुम
भी
बहुत
रोया
करोगे
मनाने
के
लिए
कॉलर
पकड़
के
कहोगे
जान
अब
ऐसा
करोगे
न
लम्हा
एक
ही
बीता
भी
होगा
दोबारा
फिर
वही
क़िस्सा
करोगे
चलो
छोड़ो
जहाँ
हो
ठीक
रहना
अना
तो
है
अना
का
क्या
करोगे
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Deepak Sharma Deep
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पीने
दें
मय-कशों
को
जहाँ
भी
पिया
करें
सज्दा
वुज़ू
करें
न
करें
बस
दु'आ
करें
कानों
ने
क्या
सुना
था
ज़बानों
ने
क्या
कहा
इंसानियत
घटी
है
यहाँ
कम
मिला
करें
रू-पोश
फिर
रहे
हैं
रियासत
के
बादशाह
गद्दी
पे
फिर
ये
कौन
है
चलिए
पता
करें
अम्न-ए-जहाँ
को
झोंक
दी
अपनी
जवानियाँ
इस
से
ज़ियादा
'दीप'
भला
और
क्या
करें
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