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Deepak Kamil
KHud ki rooh jalaaii hai
KHud ki rooh jalaaii hai | ख़ुद की रूह जलाई है
- Deepak Kamil
ख़ुद
की
रूह
जलाई
है
फिर
ये
क़लम
उठाई
है
ख़ाली
तेरा
दोश
नहीं
क़िस्मत
भी
हरजाई
है
शाइ'र
निकलो
पन्नों
से
घर
में
रोटी
ढाई
है
दिल्ली
सारी
झुलस
गई
किस
ने
आग
लगाई
है
झूठा
हँसना
ग़लत
नहीं
ये
ग़म
की
तुरपाई
है
'दीपक'
छोड़ो
दुनिया
अब
रब
के
घर
सुनवाई
है
- Deepak Kamil
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ज़ख़्म
दिल
पर
हज़ार
करता
है
और
कहता
है
प्यार
करता
है
दर्द
दिल
में
उतर
गया
कैसे
कोई
अपना
ही
वार
करता
है
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Santosh S Singh
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जौन
तुम्हें
ये
दौर
मुबारक,
दूर
ग़म-ए-अय्याम
से
हो
एक
पागल
लड़की
को
भुला
कर
अब
तो
बड़े
आराम
से
हो
Jaun Elia
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हम
ऐसे
लोग
भी
जाने
कहाँ
से
आते
हैं
ख़ुशी
में
रोते
हैं
जो
ग़म
में
मुस्कुराते
हैं
हमारा
साथ
भला
कब
तलक
निभाते
आप
कभी
कभी
तो
हमीं
ख़ुद
से
ऊब
जाते
हैं
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Mohit Dixit
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ग़म-ए-हयात
ने
आवारा
कर
दिया
वर्ना
थी
आरज़ू
कि
तिरे
दर
पे
सुब्ह
ओ
शाम
करें
Majrooh Sultanpuri
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दीदा
ओ
दिल
ने
दर्द
की
अपने
बात
भी
की
तो
किस
से
की
वो
तो
दर्द
का
बानी
ठहरा
वो
क्या
दर्द
बटाएगा
Ibn E Insha
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इतने
दुख
से
भरी
है
ये
दुनिया
आँख
खुलते
ही
आँख
भर
आए
shampa andaliib
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वफ़ा
तुम
से
करेंगे
दुख
सहेंगे
नाज़
उठाएँगे
जिसे
आता
है
दिल
देना
उसे
हर
काम
आता
है
Arzoo Lakhnavi
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ज़िंदगी
क्या
किसी
मुफ़लिस
की
क़बा
है
जिस
में
हर
घड़ी
दर्द
के
पैवंद
लगे
जाते
हैं
Faiz Ahmad Faiz
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दर्द
सहने
का
अलग
अंदाज़
है
जी
रहे
हैं
हम
अदा
की
ज़िंदगी
Farhat Abbas Shah
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लोग
हम
सेे
सीखते
हैं
ग़म
छुपाने
का
हुनर
आओ
तुमको
भी
सिखा
दें
मुस्कुराने
का
हुनर
क्या
ग़ज़ब
है
तजरबे
की
भेंट
तुम
ही
चढ़
गए
तुम
से
ही
सीखा
था
हमने
दिल
दुखाने
का
हुनर
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Kashif Sayyed
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रब्त
दिल
से
कोई
बनाओ
तुम
इश्क़
न
रंज
ही
निभाओ
तुम
इख़्तिलाफ़ात
बा-सलीक़ा
हो
ख़ुद
गिरो
न
हमें
गिराओ
तुम
फागुनी
धूप
सी
तिरी
सूरत
मास्क
से
न
इसे
छुपाओ
तुम
दिल
मिरे
वो
हँसी
छलावा
है
ख़्वाह-मख़ाह
बात
न
बढ़ाओ
तुम
उम्र
भर
दौड़ती
मशीनें
हैं
आदमी
है
कहाँ
दिखाओ
तुम
गाड़ियाँ
ऐश
नौकरी
पैसा
दोस्ती
में
इन्हें
न
लाओ
तुम
बाद
तेरे
चले
तिरी
हो
कर
वो
नई
दास्ताँ
सुनाओ
तुम
गाँव
माँ
सा
यही
पुकारे
है
थक
गए
हो
तो
लौट
आओ
तुम
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Deepak Kamil
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