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Danish Balliavi
jaan ham mushkilon men pade hote hain
jaan ham mushkilon men pade hote hain | जान हम मुश्किलों में पड़े होते हैं
- Danish Balliavi
जान
हम
मुश्किलों
में
पड़े
होते
हैं
फिर
भी
हम
यूँँ
ही
दिल
के
बड़े
होते
हैं
- Danish Balliavi
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बहुत
पहले
से
उन
क़दमों
की
आहट
जान
लेते
हैं
तुझे
ऐ
ज़िंदगी
हम
दूर
से
पहचान
लेते
हैं
Firaq Gorakhpuri
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इतनी
मिलती
है
मिरी
ग़ज़लों
से
सूरत
तेरी
लोग
तुझ
को
मिरा
महबूब
समझते
होंगे
Bashir Badr
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मेरी
ही
जान
के
दुश्मन
हैं
नसीहत
वाले
मुझ
को
समझाते
हैं
उन
को
नहीं
समझाते
हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
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पत्थर
के
ख़ुदा
पत्थर
के
सनम
पत्थर
के
ही
इंसाँ
पाए
हैं
तुम
शहर-ए-मोहब्बत
कहते
हो
हम
जान
बचा
कर
आए
हैं
Sudarshan Fakir
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ये
जो
है
फूल
हथेली
पे
इसे
फूल
न
जान
मेरा
दिल
जिस्म
से
बाहर
भी
तो
हो
सकता
है
Abbas Tabish
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उम्र
भर
मेरी
उदासी
के
लिए
काफ़ी
है
जो
सबब
मेरी
ख़मोशी
के
लिए
काफ़ी
है
जान
दे
देंगे
अगर
आप
कहेंगे
हम
सेे
जान
देना
ही
मु'आफ़ी
के
लिए
काफ़ी
है
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Aakash Giri
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चाहे
हो
आसमान
पे
चाहे
ज़मीं
पे
हो
वहशत
का
रक़्स
हम
ही
करेंगे
कहीं
पे
हो
दिल
पर
तुम्हारे
नाम
की
तख़्ती
लगी
न
थी
फिर
भी
ज़माना
जान
गया
तुम
यहीं
पे
हो
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Nirmal Nadeem
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पहले
तो
तुम्हें
जान
पुकारेंगे
यही
लोग
फिर
ख़ुद
ही
तुम्हें
जान
से
मारेंगे
यही
लोग
मुँह
पर
तो
बड़े
फ़ख्र
से
ता'ईद
करेंगे
फिर
पीठ
में
खंज़र
भी
उतारेंगे
यही
लोग
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Ashraf Ali
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जान
लेना
कि
नया
हाथ
बुलाता
है
तुम्हें
गर
कोई
हाथ
छुड़ाए
तो
छुड़ाने
देना
Ameer Imam
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अजीब
हालत
है
जिस्म-ओ-जाँ
की
हज़ार
पहलू
बदल
रहा
हूँ
वो
मेरे
अंदर
उतर
गया
है
मैं
ख़ुद
से
बाहर
निकल
रहा
हूँ
Azm Shakri
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जान
तेरी
याद
आती
है
मुहब्बत
रात
में
होती
है
मुझ
को
बहुत
तेरी
ज़रूरत
रात
में
Danish Balliavi
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मैं
लगा
था
हर
घर
की
आग
को
बुझाने
में
लोग
कुछ
लगे
थे
मेरा
ही
घर
जलाने
में
Danish Balliavi
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दहशत-गर्दी
फैल
रही
है
अब
मज़हब
के
नारों
से
लोगों
को
मारा
जाता
है
गोली
से
हथियारों
से
कौन
है
रहबर
कौन
है
रहज़न
सबको
ख़बर
है
'दानिश'
अब
क़ातिल
को
ताक़त
मिलती
है
सत्ता
के
गलियारों
से
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Danish Balliavi
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ग़म-ए-ज़िंदगी
से
परेशान
थे
जो
फ़क़त
उनकी
ख़ातिर
दु'आ
कर
रहा
था
मेरी
मौत
पर
हँस
रहे
हैं
यहाँ
लोग
मैं
जिनके
लिए
रात
दिन
मर
रहा
था
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Danish Balliavi
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आशिक़ी
की
ज़रूरत
नहीं
है
अब
किसी
की
ज़रूरत
नहीं
है
ख़ुद
मेरी
जाँ
ने
की
बे-वफ़ाई
अजनबी
की
ज़रूरत
नहीं
है
दिल
को
मैंने
बनाया
है
पत्थर
दिल-लगी
की
ज़रूरत
नहीं
है
जो
है
दिल
में
वही
है
ज़बाँ
पर
मुख़बिरी
की
ज़रूरत
नहीं
है
ख़ुश
रहे
बे-वफ़ा
वो
दग़ा-बाज़
दुश्मनी
की
ज़रूरत
नहीं
है
ज़ीस्त
गुज़रे
फ़क़त
ग़म
ही
ग़म
में
यूँँ
ख़ुशी
की
ज़रूरत
नहीं
है
मौत
से
है
मेरा
दोस्ताना
ज़िंदगी
की
ज़रूरत
नहीं
है
इश्क़
के
दर्द
गाने
की
ख़ातिर
मयकशी
की
ज़रूरत
नहीं
है
मशवरा
दे
रहा
है
वो
'दानिश'
ख़ुद-कुशी
की
ज़रूरत
नहीं
है
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Danish Balliavi
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