mujh ko thapak thapak ke sulaata raha charaaghh | मुझ को थपक थपक के सुलाता रहा चराग़

  - Danish Aziz
मुझकोथपकथपककेसुलातारहाचराग़
पहलूमेंरातभरमिरेबैठारहाचराग़
कहतारहाकिरातयेकितनीहसीनहै
तीरा-शबीकागिर्याभीकरतारहाचराग़
सूरजकाएकबारफ़क़तनामक्यालिया
मुझसेतमामरातहीलड़तारहाचराग़
उसकोमिरीशिकस्तकीइतनीख़ुशीहुई
हाथोंपेहाथमारकेहँसतारहाचराग़
मैंउसकीज़र्दलौमेंख़ुदादेखतारहा
कमरेमेंरातभरमिरेजलतारहाचराग़
तबतकमिरेक़लमनेफ़क़तरौशनीलिखी
जबतकहथेलीपरमिरीलिखतारहाचराग़
पहलूमेंउसकेकलतिरीतस्वीरथीपड़ी
ग़ज़लेंतिरेजमालपेकहतारहाचराग़
आँखेंमिरीभीसुर्ख़थींवोभीबुझाबुझा
यूँँमेरेसाथसाथहीरोतारहाचराग़
मैंउसकेपासबैठकेकहतारहाग़ज़ल
औरपूरेइंहिमाकसेसुनतारहाचराग़
कलउसकेसाथमेरीबड़ीगुफ़्तुगूहुई
मेरीकहानीसुनकेसिसकतारहाचराग़
तर्क-ए-तअ'ल्लुक़ातकामीसाक़जबहुआ
मेरेऔरउसकेदरमियाँबैठारहाचराग़
जानेहवानेक्याकहाकानोंमेंउसकेकल
'दानिश'तमामरातमचलतारहाचराग़
  - Danish Aziz
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