चेहरेपेनूर-ए-सुब्हसियहगेसुओंमेंरात
उतरीथीइकपरीलिएअपनेपरोंमेंरात
दिनतोशिकमकीआगबुझानेमेंजाएहै
शुक्र-ए-ख़ुदाकिकटतीहैदानिशवरोंमेंरात
थीवज्ह-ए-ख़्वाबकलयहीतस्कीन-ए-क़ल्बभी
हमकोतोअबडरानेलगीज़लज़लोंमेंरात
हरसाहब-ए-कमालहैफ़नकेउरूजपर
क़िबला-नुमारहीहैसभीहादसोंमेंरात
आँखोंमेंउनकाहुस्नथासोतामैंकिसतरह
आईथीगरचेघरमिरेकितनेदिनोंमेंरात
आवारगीकीछापवोआईथीछोड़ने
शर्मिंदाहोकेलौटगईदिल-जलोंमेंरात
कुछदेरहाव-हूकाथामंज़रशबाबपर
दिनकीथकीथीसोहीगईमंदिरोंमेंरात
हमथेकिग़र्क़-ए-जामरहेमय-कशोंकेबीच
हमकोतलाशकरतीरहीआबिदोंमेंरात
जुगनूचमकरहेथेउजालेमेंइश्क़के
'दाएम'क़यामकरतीकहाँबुज़दिलोंमेंरात