ab mareez-e-ishq ko kaisa thik | अब मरीज़-ए-इश्क़ को कैसा ठिकाना चाहिए

  - Chitra Bhardwaj suman
अबमरीज़-ए-इश्क़कोकैसाठिकानाचाहिए
आतिश-ए-दिलकोहवापरआशियानाचाहिए
लगगईंहैंदावपरसाँसेंबिसात-ए-इश्क़में
उसतरफ़याइसतरफ़तयहोहीजानाचाहिए
रूहकोतेरीज़रूरतइसक़दरहैजान-ए-जाँ
ज़ीस्तकेख़ातिरज़रूरीआब-ओ-दानाचाहिए
दिनढलेहीलौटआतेहैंपरिंदेशाख़पर
होगईअबराततुझकोलौटआनाचाहिए
अबथकनतकजाचुकीहैंहसरतेंदीदारकी
ख़ुश्कआँखोंमें'सुमन'दरियासमानाचाहिए
  - Chitra Bhardwaj suman
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