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Chandrajeet Regar
ped lagao dasht bachao dost
ped lagao dasht bachao dost | पेड़ लगाओ दश्त बचाओ दोस्त
- Chandrajeet Regar
पेड़
लगाओ
दश्त
बचाओ
दोस्त
जंगल
आख़िर
जंगल
होता
है
- Chandrajeet Regar
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दुश्मनी
लाख
सही
ख़त्म
न
कीजे
रिश्ता
दिल
मिले
या
न
मिले
हाथ
मिलाते
रहिए
Nida Fazli
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घर
की
इस
बार
मुकम्मल
मैं
तलाशी
लूँगा
ग़म
छुपा
कर
मिरे
माँ
बाप
कहाँ
रखते
थे
Unknown
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कुछ
इस
तरह
से
गुज़ारी
है
ज़िन्दगी
जैसे
तमाम
उम्र
किसी
दूसरे
के
घर
में
रहा
Ahmad Faraz
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रफ़्ता
रफ़्ता
ख़त्म
क़िस्सा
हो
गया,
होना
ही
था
वो
भी
आख़िर
मेरे
जैसा
हो
गया,
होना
ही
था
Ashar Najmi
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खटखटाने
की
कोई
ज़हमत
ही
आख़िर
क्यूँ
करे
इसलिए
भी
घर
का
दरवाज़ा
खुला
रखता
हूँ
मैं
Tousief Tabish
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मिरे
सलीक़े
से
मेरी
निभी
मोहब्बत
में
तमाम
उम्र
मैं
नाकामियों
से
काम
लिया
Meer Taqi Meer
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सूरज
लिहाफ़
ओढ़
के
सोया
तमाम
रात
सर्दी
से
इक
परिंदा
दरीचे
में
मर
गया
Athar nasik
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इसी
लिए
तो
यहाँ
अब
भी
अजनबी
हूँ
मैं
तमाम
लोग
फ़रिश्ते
हैं
आदमी
हूँ
मैं
Bashir Badr
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चलता
रहने
दो
मियाँ
सिलसिला
दिलदारी
का
आशिक़ी
दीन
नहीं
है
कि
मुकम्मल
हो
जाए
Abbas Tabish
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वो
एक
दिन
जो
तुझे
सोचने
में
गुज़रा
था
तमाम
उम्र
उसी
दिन
की
तर्जुमानी
है
Abhishek shukla
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बस
यही
सोच
कर
हम
तुझे
छूने
से
डरते
हैं
ये
सुना
है
तेरे
रंग
ख़ुद
देवता
भरते
है
Chandrajeet Regar
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कभी
कभी
लगता
है
दुनिया
में
कुछ
भी
नईं
फिर
मैं
सोचता
हूँ
दुनिया
में
तू
तो
है
ही
Chandrajeet Regar
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अब
तो
तुझ
सेे
मैं
कोई
शिकायत
भी
नईं
करता
तुझको
किस
बात
की
अब
शिकायत
है
मेरे
दोस्त
दो
में
से
एक
चुनने
की
नोबत
ले
आए
हो
फिर
मोहब्बत
नहीं
ये,
सियासत
है
मेरे
दोस्त
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Chandrajeet Regar
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ले
डूबी
है
बीच
भँवर
में
इक
रिश्ते
को
मायूसी
कुछ
हल्के
शब्दों
का
मैसेज
इतना
भारी
होता
है
Chandrajeet Regar
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ज़ख़्म
यूँँ
मेरे
मुक़द्दर
हो
रहे
हैं
हाल-ए-ज़ीस्त
बद
से
बदतर
हो
रहे
हैं
तेरी
हिजरत
की
कबाहत
इन
पे
गुज़री
फूल
तेरे
बाद
पत्थर
हो
रहे
हैं
एक
क़तरा
तक
नहीं
मुझ
में
ख़ुशी
का
ग़म
समुंदर-दर-समुंदर
हो
रहे
हैं
तन्हा
जीना
खेल
नईं
है,
हम
सेे
पूछो
घर
हमारे
कैसे
खंडर
हो
रहे
हैं
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Chandrajeet Regar
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