ghazal tum ko sunaane ke bahaane dhundh leta hooñ | ग़ज़ल तुम को सुनाने के बहाने ढूँड लेता हूँ

  - Chandra Shekhar Varma
ग़ज़लतुमकोसुनानेकेबहानेढूँडलेताहूँ
मैंयूँँहीमुस्कुरानेकेबहानेढूँडलेताहूँ
मैंकाफ़िरहूँख़ुदाकेदरकभीसज्दानहींकरता
मगरमैंसरझुकानेकेबहानेढूँडलेताहूँ
कोईभीखेलहोमैंएहतियातइतनीबरतताहूँ
मैंपहलेहारजानेकेबहानेढूँढ़लेताहूँ
नहींदिखताहैमुझकोठीकसेअबदूरकाकहकर
तिरेनज़दीकआनेकेबहानेढूँडलेताहूँ
मैंउसकेदरपेजाकरमाँगताहूँहाथजबतेरा
ख़ुदाकोआज़मानेकेबहानेढूँडलेताहूँ
तिरीमहफ़िलमेंआताहूँपहनकरधूपकाचश्मा
नज़रतुझपरटिकानेकेबहानेढूँडलेताहूँ
मैंला-जवाबहूँलेकिनहैअक़ीदाईदपरमेरा
गलेतुझकोलगानेकेबहानेढूँडलेताहूँ
हैमक़्सदयेकिलोगोंकेकलेजोंकोमिलेठंडक
मैंअपनादिलजलानेकेबहानेढूँडलेताहूँ
बहुतज़ोरोंसेहँसपड़ताहूँमैंबिनबातकेअक्सर
मैंयूँँआँसूबहानेकेबहानेढूँडलेताहूँ
  - Chandra Shekhar Varma
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy