fitna-e-rozgaar ki baatein | फ़ित्ना-ए-रोज़गार की बातें

  - Chandar Bhan Kaifi Dehelvi
फ़ित्ना-ए-रोज़गारकीबातें
ऐसीहैंजैसेयारकीबातें
हिज्रमेंवस्ल-ए-यारकीबातें
हैंख़िज़ाँमेंबहारकीबातें
लाला-ओ-गुलकैज़िक्रसेबेहतर
एकजान-ए-बहारकीबातें
छेड़केसाथनोकझोकभीहै
गुलसेहोतीहैंख़ारकीबातें
सबसमझतेहैंमैंकहूँकहूँ
इसदिल-ए-बे-क़रारकीबातें
छेड़देताहूँदिल-लगीकेलिए
वस्लमेंइंतिज़ारकीबातें
जोतुमरूठतेतोकरलेते
औरदोचारप्यारकीबातें
नंगहैंअज़्म-ए-मुस्तक़िलकेलिए
दहर-ना-पाएदारकीबातें
दिल-नशींहैंबसंतमें'कैफ़ी'
येशराब-ओ-ख़ुमारकीबातें
  - Chandar Bhan Kaifi Dehelvi
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