agar dard-e-mohabbat se na insaan aashna hotana kuchh marne ka gham hota na jeene ka mazaa hota | अगर दर्द-ए-मोहब्बत से न इंसाँ आश्ना होता

  - Chakbast Brij Narayan
अगरदर्द-ए-मोहब्बतसेइंसाँआश्नाहोता
कुछमरनेकाग़महोताजीनेकामज़ाहोता
बहार-ए-गुलमेंदीवानोंकासहरामेंपराहोता
जिधरउठतीनज़रकोसोंतलकजंगलहराहोता
मय-ए-गुल-रंगलुटतीयूँँदर-ए-मय-ख़ानावाहोता
पीनेकीकमीहोतीसाक़ीसेगिलाहोता
हज़ारोंजानदेतेहैंबुतोंकीबे-वफ़ाईपर
अगरउनमेंसेकोईबा-वफ़ाहोतातोक्याहोता
रुलायाअहल-ए-महफ़िलकोनिगाह-ए-यासनेमेरी
क़यामतथीजोइकक़तराइनआँखोंसेजुदाहोता
ख़ुदाकोभूलकरइंसानकेदिलकायेआलमहै
येआईनाअगरसूरत-नुमाहोतातोक्याहोता
अगरदमभरभीमिटजातीख़लिशख़ार-ए-तमन्नाकी
दिल-ए-हसरत-तलबकोअपनीहस्तीसेगिलाहोता
  - Chakbast Brij Narayan
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