zindagi se rahi hai baghaavat mirii | ज़िंदगी से रही है बग़ावत मिरी

  - Bhuwan Singh
ज़िंदगीसेरहीहैबग़ावतमिरी
मैंनहींदेखताअबमुसीबतमिरी
चारआँसूमिलेऔरकुछज़ख़्महैं
इतनीसीहैयहाँपरविरासतमिरी
हरकोईदेरहाथाफ़क़तदर्दही
कौनकरतायहाँफिरवकालतमिरी
इकदफ़ाहीहँसाथाहँसीझूठकी
फिरयेभीबनगईएकआदतमिरी
उम्रभरझूठहीकहरहाथामगर
आपतोजानतेथेहालतमिरी
  - Bhuwan Singh
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