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Bhuwan Singh
yahii laga tha ki qismat sanwarne waali thii
yahii laga tha ki qismat sanwarne waali thii | यही लगा था कि क़िस्मत सँवरने वाली थी
- Bhuwan Singh
यही
लगा
था
कि
क़िस्मत
सँवरने
वाली
थी
हाँ
जब
वो
ख़ुद
को
मेरे
नाम
करने
वाली
थी
किसी
ने
मुझ
से
भी
वादे
किए
थे
जन्मों
के
थी
इक
जो
साथ
मेरे
जीने
मरने
वाली
थी
मैं
था
जो
रिश्ते
में
इक
हद
में
रहने
वाला
था
वो
बे-वफ़ा
थी
तो
हद
से
गुज़रने
वाली
थी
ये
हिज्र
उसके
ही
चेहरे
से
ले
गया
है
नूर
बिछड़
के
मुझ
से
जो
लड़की
निखरने
वाली
थी
- Bhuwan Singh
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कोई
तरीक़ा
ही
नहीं
इसको
बचाने
के
लिए
दिल
तो
बना
ही
है
मियाँ
बस
चोट
खाने
के
लिए
उम्मीद
मत
रखना
कि
अब
वादे
निभाएगा
कोई
हर
शख़्स
वादे
करता
है
अब
तोड़
जाने
के
लिए
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मैं
आज
कर
रहा
हूँ
ये
एलान
साहिबा
दरबार-ए-दिल
की
आप
ही
हो
शान
साहिबा
मैं
आप
के
इलावा
किसी
और
का
नहीं
इतना
हुआ
न
करिए
परेशान
साहिबा
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सब
सोचते
थे
पहले
कि
क़िस्मत
का
हाथ
है
मैंने
कहा
भी
सब
सेे
कि
मेहनत
का
हाथ
है
मैं
शेर-ओ-शायरी
की
बदौलत
यहाँ
पे
हूॅं
सब
कहते
है
कि
इस
में
उस
औरत
का
हाथ
है
हाथों
में
आपके
है
लकीरें
तबाही
की
यानी
हर
एक
हाथ
मुसीबत
का
हाथ
है
कैसे
मेरी
ज़मीन
रक़ीबों
में
बँट
गई
क्या
इस
में
आप
ही
की
हुकूमत
का
हाथ
है
ज़ख़्मों
को
मैं
सबूत
बनाकर
कहाँ
फिरूँ
हर
सम्त
उसके
साथ
अदालत
का
हाथ
है
दोनों
के
बीच
फ़ासले
आने
थे
आ
गए
और
इस
में
तो
फ़क़त
मेरी
ग़ुर्बत
का
हाथ
है
लैला
से
पहले
जैसा
भी
था
क़ैस
क़ैस
था
मजनूँ
बनाने
में
तो
मोहब्बत
का
हाथ
है
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कैसे
कहूँ
कि
एक
बला
सी
है
ज़िंदगी
कैसे
कहूँ
कि
ख़ून
की
प्यासी
है
ज़िंदगी
ये
झूठ
है
कि
ज़िंदगी
में
है
ज़रा
सा
ग़म
सच
तो
ये
है
कि
ग़म
में
ज़रा
सी
है
ज़िंदगी
तुम
सेे
भी
पहले
उसने
मुझे
मुॅंह
लगाया
था
तुम
सेे
भी
ज़्यादा
तो
मेरी
बासी
है
ज़िंदगी
मुझ
पर
वो
राज
करती
है
जैसे
ग़ुलाम
हूँ
यानी
उस
एक
शख़्स
की
दासी
है
ज़िंदगी
मिलती
नहीं
सज़ाऍं
कभी
बेवफ़ाओं
को
संगीन
मामलों
में
सियासी
है
ज़िंदगी
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अपने
इश्क़
को
मेरे
रास्ते
लगा
लेना
या
कहानी
में
अपने
फ़लसफ़े
लगा
लेना
तू
अगर
दिखे
तो
बस
देखता
रहूॅंगा
मैं
मैं
अगर
दिखूँ
तो
मुझको
गले
लगा
लेना
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