do jahaanon men bhatak sakti hain ghar kii baatein | दो जहानों में भटक सकती हैं घर की बातें

  - Bhuwan Singh
दोजहानोंमेंभटकसकतीहैंघरकीबातें
आइनेसेकरोदीदा-ए-तरकीबातें
हमकोअबकोईतवक़्क़ोरहीकमरेसे
हमनेसुनरक्खीहैंसाहबपस-ए-दरकीबातें
आपकीबातकोहमनेरखाअपनेतकही
आपउधरलेगएथेसारीइधरकीबातें
क्यूँपरिंदोंसेज़ियादादुखीथावोबूढ़ा
क्यूँकोईसुनसकाकटतेशजरकीबातें
उम्रभरउसकोदिखातारहामंज़िलकाख़्वाब
परकभीहोंसकीउससेसफ़रकीबातें
सोचोयेअहल-ए-ज़मींमानलेकाफ़िरकोख़ुदा
सोचोदरवेशकरेदौलत-ओ-ज़रकीबातें
दिनकोमैंरातबनासकताहूँदोमिसरोंमें
तुमनहींजानतेहोमेरेहुनरकीबातें
  - Bhuwan Singh
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy