कोईलश्करकिधड़कतेहुएग़मआतेहैं
शामकेसाएबहुततेज़क़दमआतेहैं
दिलवोदरवेशहैजोआँखउठाताहीनहीं
उसकेदरवाज़ेपेसौअहल-ए-करमआतेहैं
मुझसेक्याबातलिखानीहैकिअबमेरेलिए
कभीसोनेकभीचाँदीकेक़लमआतेहैं
मैंनेदोचारकिताबेंतोपढ़ीहैंलेकिन
शहरकेतौर-तरीक़ेमुझेकमआतेहैं
ख़ूब-सूरतसाकोईहादिसाआँखोंमेंलिए
घरकीदहलीज़पेडरतेहुएहमआतेहैं