zeest apni ik dard-e-paiham hai gham hai | ज़ीस्त अपनी इक दर्द-ए-पैहम है ग़म है

  - Dharmesh bashar
ज़ीस्तअपनीइकदर्द-ए-पैहमहैग़महै
‎दर्दहीअपनाअबतोहमदमहैग़महै
‎पंछियोंकोदेबाग़बाँकुछरिआ'यत
‎क़ैदमेंउनकाटूटतादमहैग़महै
वुसअत-ए-सहराजिसकेआगेहुईहै
‎उसकीचाहतभीअबमुझेकमहैग़महै
‎दश्तजैसीवीरानीथीआँखोंमेंसुब्ह
‎औरसर-ए-शबयेआँखेंजोनमहैग़महै
‎की'बशर'हाल-ए-ज़ारकीउसनेपुर्सिश
‎फिरमुझेबतलानापड़ाग़महैग़महै
  - Dharmesh bashar
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