taaseer-e-ishq kya hai unhen kuchh khabar nahin | तासीर-ए-इश्क़ क्या है उन्हें कुछ ख़बर नहीं

  - Dharmesh bashar
तासीर-ए-इश्क़क्याहैउन्हेंकुछख़बरनहीं
येभीहैक्याअसरजोइधरहैउधरनहीं
ख़ालीमुसाफ़िरोंसेमिरीरहगुज़रनहीं
परयेभीसचहैकोईशरीक-ए-सफ़रनहीं
पास-ए-अदबनेदस्त-ए-तलबरोकहीलिया
दिलमेंभलेहीहाँहैलबोंपरमगरनहीं
दिलछोड़जाएँगरतोकहाँजाएँरंज-ओ-ग़म
येउनकीमिल्कियतहैकिराएकाघरनहीं
दाग़-ए-लहूजहाँमिलेमुसाफ़िरों
छालेगवाहहैवोमिरीरहगुज़रनहीं
गिरपाएहमदौरकीनिचलीहदोंतलक
लाखोंहुनरहैंहममेंमगरयेहुनरनहीं
क़ासिदनेजोकहातोलगाहैवोआएँगे
परकहतातजरबाकिख़बरमोतबरनहीं
जिस
में'बशर'याद-ए-सनमहोदर्दहो
वोदिलभीदिलनहींवोजिगरभीजिगरनहीं
  - Dharmesh bashar
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