kabhi maqaam ka koii pata nahin hota | कभी मक़ाम का कोई पता नहीं होता

  - Dharmesh bashar
कभीमक़ामकाकोईपतानहींहोता
कभीपताभीहोतोरास्तानहींहोता
अगरमैंतेज़हवासेलड़ानहींहोता
चराग़कोईसलामतबचानहींहोता
हमारेक़त्लकेहैंकितनेदस्तयाबसबूत
हमारेहक़मेंमगरफ़ैसलानहींहोता
बदलदियाहैनएदौरनेबहुतइसको
पुरानाआदमीफिरभीनयानहींहोता
ज़रासीबातपेतुमनेतोफेरलींनज़रें
ज़रासीबातपेकोईख़फ़ानहींहोता
येराज़मुझपेबहुतबादमेंखुलाजाकर
सफ़रमेंसाथकोईक़ाफ़िलानहींहोता
येतोहरएककाअपनानज़रियाहैवर्ना
ग़ज़लकाकोईनयाज़ावियानहींहोता
सभीकोआताहैकोईकोईकाम'बशर'
हरएकशख़्समगरकामकानहींहोता
  - Dharmesh bashar
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