raushni ho na saki shaam ke hangaam ke saath | रौशनी हो न सकी शाम के हंगाम के साथ

  - Baldev singh Hamdam
रौशनीहोसकीशामकेहंगामकेसाथ
औरहमदीपजलातेरहेहरशामकेसाथ
दूरबढ़ताहीगयाहसरत-ए-नाकामकेसाथ
दिलमेंइकटीसउठीआपकेहंगामकेसाथ
आपनेपुर्सिश-ए-ग़मकाभीतकल्लुफ़किया
दिलमेंहमजलतेरहेहसरत-ए-नाकामकेसाथ
जानेक्यूँँआजमिरेइश्क़कीतश्हीरहुई
हरज़बाँपरहैमिरानामतेरेनामकेसाथ
दौर-ए-मयख़त्महुआशम्अकादिलबैठगया
रौनक़-ए-बज़्मगईसाक़ी-ए-गुलफ़ामकेसाथ
वक़्तकीबातहैक्यावक़्तगुज़रजाएगा
औरकुछदेरचलोगर्दिश-ए-अय्यामकेसाथ
मंज़िल-ए-इश्क़मेंक्याकामथाउनका'हमदम'
थककेजोबैठगएराहमेंआरामकेसाथ
  - Baldev singh Hamdam
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