naqsh-e-paa jab dhoondhti hooñ men tumhaara ret par | नक़्श-ए-पा जब ढूँढती हूँ में तुम्हारा रेत पर

  - Baharunnisa Bahar
नक़्श-ए-पाजबढूँढतीहूँमेंतुम्हारारेतपर
यादकीकुछसीपियाँहैंअबसहारारेतपर
जाँहमारीबचगईहैमौसमोंकेख़ौफ़से
जातीरुतकेहममुसाफ़िरघरहमारारेतपर
साहिल-ए-अरमाँसेउट्ठीजबभीमौज-ए-बे-अमाँ
बैठकरमैंदेखतीहूँयेनज़ारारेतपर
तूउलझकेरहगयाहैबंधनोंकेजालमें
आँसुओंकेतारटूटेहैइशारारेतपर
हसरत-ए-ता'मीरकीअबदिलमेंख़्वाहिशहीनहीं
किसक़दरवीराँखंडरहैघरहमारारेतपर
तितलियोंकोरोकलोजानेदोबाद-ए-सबा
अब'बहार'-ए-बे-ख़िज़ाँकाहैगुज़ारारेतपर
  - Baharunnisa Bahar
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