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Binte Reshma
haar jaane pe log kahte hain
haar jaane pe log kahte hain | हार जाने पे लोग कहते हैं
- Binte Reshma
हार
जाने
पे
लोग
कहते
हैं
कौन
झगड़ा
करे
मुक़द्दर
से
- Binte Reshma
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जो
मिल
गया
उसी
को
मुक़द्दर
समझ
लिया
जो
खो
गया
मैं
उस
को
भुलाता
चला
गया
Sahir Ludhianvi
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कहीं
गुलाल
के
हिस्से
में
कोई
गाल
नहीं
कहीं
पे
गाल
की
तक़दीर
में
गुलाल
नहीं
Harman Dinesh
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उन
के
होने
से
बख़्त
होते
हैं
बाप
घर
के
दरख़्त
होते
हैं
Unknown
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कभी
मैं
अपने
हाथों
की
लकीरों
से
नहीं
उलझा
मुझे
मालूम
है
क़िस्मत
का
लिक्खा
भी
बदलता
है
Bashir Badr
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किसी
को
साल-ए-नौ
की
क्या
मुबारकबाद
दी
जाए
कैलन्डर
के
बदलने
से
मुक़द्दर
कब
बदलता
है
Aitbar Sajid
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मिले
किसी
से
गिरे
जिस
भी
जाल
पर
मेरे
दोस्त
मैं
उसको
छोड़
चुका
उसके
हाल
पर
मेरे
दोस्त
ज़मीं
पे
सबका
मुक़द्दर
तो
मेरे
जैसा
नहीं
किसी
के
साथ
तो
होगा
वो
कॉल
पर
मेरे
दोस्त
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Ali Zaryoun
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जिन
की
दर्द-भरी
बातों
से
एक
ज़माना
राम
हुआ
'क़ासिर'
ऐसे
फ़न-कारों
की
क़िस्मत
में
बन-बास
रहा
Ghulam Mohammad Qasir
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कोई
भी
रोक
न
पाता,
गुज़र
गया
होता
मेरा
नसीब-ए-मोहब्बत
सँवर
गया
होता
न
आईं
होती
जो
बेग़म
मेरी
अयादत
को
मैं
अस्पताल
की
नर्सों
पर
मर
गया
होता
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Paplu Lucknawi
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वो
तिरे
नसीब
की
बारिशें
किसी
और
छत
पे
बरस
गईं
दिल-ए-बे-ख़बर
मिरी
बात
सुन
उसे
भूल
जा
उसे
भूल
जा
Amjad Islam Amjad
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मेरी
तक़दीर
में
जलना
है
तो
जल
जाऊँगा
तेरा
वा'दा
तो
नहीं
हूँ
जो
बदल
जाऊँगा
Sahir Ludhianvi
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डूबने
वाला
तो
कुछ
देर
में
डूबेगा
मगर
डूबता
देखने
वालों
को
बड़ी
जल्दी
है
Binte Reshma
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तुम
मेरे
ज़ेहन
से
उतर
जाओ
मैं
तुम्हें
उम्र
भर
दु'आ
दूँगी
Binte Reshma
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ये
दर्द
के
टुकड़े
हैँ
अश'आर
नहीं
अज़रा
हम
लफ़्ज़ों
के
धागों
में
ज़ख़्मों
को
पिरोते
हैँ
Binte Reshma
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तुम
सेे
सौदा
हुआ
था
लम्हों
का
तुमने
सदियाँ
उदास
कर
डालीं
Binte Reshma
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किसी
बाज़ार
से
जो
मिल
जाता
अपना
बचपन
ख़रीद
लाते
फिर
Binte Reshma
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