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Azhar Faragh
zaraa si der thehar kar sawaal karte hain
zaraa si der thehar kar sawaal karte hain | ज़रा सी देर ठहर कर सवाल करते हैं
- Azhar Faragh
ज़रा
सी
देर
ठहर
कर
सवाल
करते
हैं
सफ़र
से
आए
हुओं
का
ख़याल
करते
हैं
मैं
जानता
हूँ
मुझे
मुझ
सेे
माँगने
वाले
पराई
चीज़
का
जो
लोग
हाल
करते
हैं
वो
दस्त-ए-आब
हमें
इसलिए
नहीं
होता
हम
इस्तिफ़ादा
नहीं
देखभाल
करते
हैं
- Azhar Faragh
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जाने
किस
किस
का
ख़याल
आया
है
इस
समुंदर
में
उबाल
आया
है
एक
बच्चा
था
हवा
का
झोंका
साफ़
पानी
को
खंगाल
आया
है
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Dushyant Kumar
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चला
था
ज़िक्र
ज़माने
की
बे-वफ़ाई
का
सो
आ
गया
है
तुम्हारा
ख़याल
वैसे
ही
Ahmad Faraz
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पहले
ख़याल
रख
मिरा
मेहमान
कर
मुझे
फिर
अपनी
कोई
चाल
से
हैरान
कर
मुझे
हैं
कौन
आप,
याद
नहीं,कब
मिले
थे
हम
इतना
भी
ख़ुश
न
होइए
पहचान
कर
मुझे
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
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करता
नहीं
ख़याल
तेरा
इस
ख़याल
से
तंग
आ
गया
अगर
तू
मेरी
देखभाल
से
चल
मेरे
साथ
और
तबीयत
की
फ़िक्र
छोड़
दो
मील
दूर
है
मेरा
घर
अस्पताल
से
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Tehzeeb Hafi
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मेरा
ख़याल
तेरी
चुप्पियों
को
आता
है
तेरा
ख़याल
मेरी
हिचकियों
को
आता
है
Kumar Vishwas
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कहानी
ख़त्म
हुई
तब
मुझे
ख़याल
आया
तेरे
सिवा
भी
तो
किरदार
थे
कहानी
में
Farhat Ehsaas
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हम
को
मालूम
है
जन्नत
की
हक़ीक़त
लेकिन
दिल
के
ख़ुश
रखने
को
'ग़ालिब'
ये
ख़याल
अच्छा
है
Mirza Ghalib
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भुला
दिया
है
जो
तू
ने
तो
कुछ
मलाल
नहीं
कई
दिनों
से
मुझे
भी
तिरा
ख़याल
नहीं
Navin C. Chaturvedi
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सारे
ग़म
भूल
गए
आपके
रोने
पे
मुझे
किसको
ठंडक
में
पसीने
का
ख़्याल
आता
है
आखरी
उम्र
में
जाते
है
मदीने
हम
लोग
मरने
लगते
है
तो
जीने
का
ख़याल
आता
है
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Nadir Ariz
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जब
यार
ने
उठा
कर
ज़ुल्फ़ों
के
बाल
बाँधे
तब
मैं
ने
अपने
दिल
में
लाखों
ख़याल
बाँधे
Mohammad Rafi Sauda
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मेरे
बस
में
नहीं
इलाज
उस
का
ज़ख़्म
देखा
है
मैंने
आज
उस
का
पस-ए-दरबार
भी
है
इक
दरबार
कासा
बनता
है
रोज़
ताज
उस
का
कोई
लश्कर
भी
ग़ालिब
आ
जाए
दोनों
जानिब
है
इंदिराज
उस
का
जितना
आगे
का
आदमी
है
वो
रद
न
कर
दे
उसे
समाज
उस
का
चोर
को
रिज़्क़
की
कमी
कैसी
सारे
खेतों
में
है
अनाज
उस
का
गिले
तकिए
पे
दर्ज
है
'अज़हर'
बंध
कमरे
में
एहतिजाज
उस
का
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Azhar Faragh
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वो
जो
इक
शख़्स
मुझे
ताना-ए-जाँ
देता
है
मरने
लगता
हूँ
तो
मरने
भी
कहाँ
देता
है
तेरी
शर्तों
पे
ही
करना
है
अगर
तुझको
क़ुबूल
ये
सहूलत
तो
मुझे
सारा
जहाँ
देता
है
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Azhar Faragh
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मेरी
ख्वाहिश
है
कि
तुझे
फूलों
से
फतह
करूँ
वरना
ये
काम
तो
तलवार
भी
कर
सकती
है
Azhar Faragh
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जब
सर-ए-शाम
पजीराई-ए-फ़न
होती
है
शाहज़ादी
को
कनीज़ों
से
जलन
होती
है
ले
तो
आया
हूँ
तुझे
घेर
के
अपनी
जानिब
आगे
इंसान
की
अपनी
भी
लगन
होती
है
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Azhar Faragh
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हाए
वो
भीगा
रेशमी
पैकर
तौलिया
खुरदुरा
लगे
जिस
को
Azhar Faragh
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