तमाम शिकवे गले मिल के भूल जाऊँ अभी

  - Aafreen Faheem
तमामशिकवेगलेमिलकेभूलजाऊँअभी
मैंचाहतीहूँगलेसेतुझेलगाऊँअभी
हजारग़मसहेसीनेकेक़ैद-ख़ानेमें
मगरतकाज़ा-ए-उल्फ़तहैमुस्कुराऊँअभी
बहुतउदासहूँलेकिनयेदिलकीहसरतहै
कितेरीयादकेदरियामेंडूबजाऊँअभी
सहरकावक़्तहैऔरनींदभीनहींआती
तोक्यूँतेरीग़ज़लकोईगुनगुनाऊँअभी
किसीतरहतूमेरेपासलौटकरजा
मैंकितनातड़पीहूँतेरेलिएबताऊँअभी
येसोचकरहीबतायाहैहाल-ए-दिलमैंने
किअपनेआपहीकितनाफ़रेबखाऊँअभी
  - Aafreen Faheem
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