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Avtar Singh Jasser
janab aadha adhoora sa vahii qissa hooñ main to
janab aadha adhoora sa vahii qissa hooñ main to | जनाब आधा अधूरा सा वही क़िस्सा हूँ मैं तो
- Avtar Singh Jasser
जनाब
आधा
अधूरा
सा
वही
क़िस्सा
हूँ
मैं
तो
कई
किरदार
भी
जिसको
मुकम्मल
कर
न
पाए
- Avtar Singh Jasser
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मोहब्बत
दो-क़दम
पर
थक
गई
थी
मगर
ये
हिज्र
कितना
चल
रहा
है
Zubair Ali Tabish
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सब
दे
रहे
हैं
दिल
मुझे
अपना
निकाल
के
दरअस्ल
मैंने
शे'र
कहे
हैं
कमाल
के
अब
आप
सोच
लीजिए
मजबूरियाँ
मेरी
हिज्र-ओ-विसाल
तय
करूँँ
सिक्का
उछाल
के
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Tanoj Dadhich
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मिरी
ज़िंदगी
तो
गुज़री
तिरे
हिज्र
के
सहारे
मिरी
मौत
को
भी
प्यारे
कोई
चाहिए
बहाना
Jigar Moradabadi
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हिज्र
में
इश्क़
यूँँ
रखा
आबाद
हिचकियाँ
तन्हा
तन्हा
लेते
रहे
Siraj Tonki
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तुम्हारा
बैग
भी
तय्यार
कर
के
रक्खा
है
अकेली
हिज्र
के
आज़ार
क्यूँ
उठाऊँ
मैं
Zahraa Qarar
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मुमकिना
फ़ैसलों
में
एक
हिज्र
का
फ़ैसला
भी
था
हमने
तो
एक
बात
की
उसने
कमाल
कर
दिया
Parveen Shakir
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लंबा
हिज्र
गुज़ारा
तब
ये
मिलने
के
पल
चार
मिले
जैसे
एक
बड़े
हफ़्ते
में
छोटा
सा
इतवार
मिले
माना
थोड़ा
मुश्किल
है
पर
रोज़
दु'आ
में
माँगा
है
जो
मुझ
सेे
भी
ज़्यादा
चाहे
तुझको
ऐसा
यार
मिले
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Bhaskar Shukla
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'हर्ष'
वस्ल
में
जितनी
मर्ज़ी
शे'र
कह
लो
तुम
हिज्र
के
बिना
इन
में
जान
आ
नहीं
सकती
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Harsh saxena
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तेरी
गली
को
छोड़
के
पागल
नहीं
गया
रस्सी
तो
जल
गई
है
मगर
बल
नहीं
गया
मजनूँ
की
तरह
छोड़ा
नहीं
मैं
ने
शहर
को
या'नी
मैं
हिज्र
काटने
जंगल
नहीं
गया
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Ismail Raaz
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वो
शादी
तो
करेगी
मगर
एक
शर्त
पर
हम
हिज्र
में
रहेंगे
अगर
नौकरी
नहीं
Harsh saxena
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बिछड़ते
वक़्त
हम
रोने
लगे
थे
मगर
फिर
भी
जुदा
होने
लगे
थे
Avtar Singh Jasser
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इश्क़
में
हद
से
गुज़र
जाते
हैं
लोग
ख़ुद-कुशी
करते
हैं
मर
जाते
हैं
लोग
क्या
यक़ीं
कोई
करे
यारो
किसी
का
अपने
वादों
से
मुकर
जाते
हैं
लोग
हम
बहार
ए
ग़म
में
खिलते
हैं
मगर
ऐसे
मौसम
में
बिखर
जाते
हैं
लोग
ठोकरें
खा
खा
के
बिगड़े
हम
मगर
ठोकरें
खा
के
सुधर
जाते
हैं
लोग
बस
उसी
जानिब
न
'जस्सर'
हम
गए
कारवाँ
लेकर
जिधर
जाते
हैं
लोग
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Avtar Singh Jasser
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मैं
तो
जस्सर
और
भी
रौशन
हुआ
जब
किसी
ने
भी
बुझाया
देर
तक
Avtar Singh Jasser
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हो
वकील
अच्छा
नज़र
में
तो
बता
देना
मुझे
इक
मुक़दमा
दिल
मेरा
दायर
करेगा
इश्क़
पे
Avtar Singh Jasser
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विरासत
में
मिली
तहज़ीब
का
यूँँ
मान
रखता
हूँ
मैं
मज़हब
से
ज़ियादा
दिल
में
हिन्दुस्तान
रखता
हूँ
मुहब्बत
और
नफ़रत
जो
भी
चाहोगे
मिलेगा
वो
चिराग़ों
की
हिफ़ाज़त
में
कई
तूफ़ान
रखता
हूँ
पनपती
साजिशें
हैं
जिस
में
अपनों
के
लिए
अक्सर
मैं
वो
कुंज-ए-जिगर
“जस्सर”
सदा
वीरान
रखता
हूँ
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Avtar Singh Jasser
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