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Avtar Singh Jasser
hamesha ke li.e vo bhi hamaara ho nahin saka
hamesha ke li.e vo bhi hamaara ho nahin saka | हमेशा के लिए वो भी हमारा हो नहीं सकता
- Avtar Singh Jasser
हमेशा
के
लिए
वो
भी
हमारा
हो
नहीं
सकता
फ़क़त
इक
इश्क़
हम
से
भी
दोबारा
हो
नहीं
सकता
- Avtar Singh Jasser
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मेरा
किरदार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है,
यह
समझदार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
इश्क़
है
वा'दा
फ़रामोश
नहीं
है
कोई,
दिल
तलबग़ार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
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Vishal Singh Tabish
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सिर्फ़
ज़िंदा
रहने
को
ज़िंदगी
नहीं
कहते
कुछ
ग़म-ए-मोहब्बत
हो
कुछ
ग़म-ए-जहाँ
यारो
Himayat Ali Shayar
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लिखी
होगी
मोहब्बत
जिन
सफ़ों
पर
मेरा
दावा
है
वो
नम
ही
मिलेंगे
किसी
दिन
ऊब
जाओगे
सभी
से
तुम्हें
उस
रोज़
फिर
हम
ही
मिलेंगे
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Ritesh Rajwada
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दुकानें
नफ़रतों
की
ख़ूब
आसानी
से
चलती
हैं
अजब
दुनिया
है
जाने
इश्क़
क्यूँ
करने
नहीं
देती
Bhaskar Shukla
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अदाकार
के
कुछ
भी
बस
का
नहीं
है
मोहब्बत
है
ये
कोई
ड्रामा
नहीं
है
जिसे
तेरी
आँखें
बताती
हैं
रस्ता
वो
राही
कहीं
भी
पहुँचता
नहीं
है
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Zubair Ali Tabish
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याद
रखना
ही
मोहब्बत
में
नहीं
है
सब
कुछ
भूल
जाना
भी
बड़ी
बात
हुआ
करती
है
Jamal Ehsani
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ज़्यादा
मीठा
हो
तो
चींटा
लग
जाता
है
सच्चे
इश्क़
को
अक्सर
बट्टा
लग
जाता
है
हमने
अपनी
जान
गंवाई
तब
जाना
भाव
मिले
तो
कुछ
भी
सट्टा
लग
जाता
है
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Ritesh Rajwada
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सोच
कर
पाँव
डालना
इस
में
इश्क़
दरिया
नहीं
है
दलदल
है
Renu Nayyar
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ख़ुद-कुशी
जुर्म
भी
है
सब्र
की
तौहीन
भी
है
इस
लिए
इश्क़
में
मर
मर
के
जिया
जाता
है
Ibrat Siddiqui
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मिलता
नहीं
जहाँ
में
कोई
काम
ढंग
का
इक
इश्क़
था
सो
वो
भी
कई
बार
कर
चुके
Nomaan Shauque
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हम
उतना
दूर
ख़ुद
से
जा
रहे
हैं
तेरे
नज़दीक
जितना
आ
रहे
हैं
ज़रा
तू
पेश
आ
बेगानगी
से
तेरी
निस्बत
से
हम
उकता
रहे
हैं
मेरे
झूठों
में
हामी
भरने
वाले
कहा
सच
तो
मुझे
झुठला
रहे
हैं
सज़ा
जिसकी
अभी
तक
मिल
रही
है
ख़ता
हम
क्यूँ
वही
दुहरा
रहे
हैं
मुझे
मंज़िल
तो
'जस्सर'
मिल
ही
जाती
तेरे
नक़्श-ए-क़दम
भटका
रहे
हैं
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Avtar Singh Jasser
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मेरे
हिस्से
में
आया
इक
ऐसा
ग़म
जिस
के
आगे
लाखों
ख़ुशियाँ
भी
हैं
कम
Avtar Singh Jasser
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वो
रूठे
तो
मनाता
ही
नहीं
मैं
बुझी
सिगरेट
जलाता
ही
नहीं
मैं
Avtar Singh Jasser
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वो
आ
के
लौट
भी
गया
जिसका
था
इंतिज़ार
और
मैं
घड़ी-घड़ी,
घड़ी
ही
देखता
रहा
Avtar Singh Jasser
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मुझे
तुम
से
ज़रा
सी
भी
शिकायत
अब
नहीं
होगी
अगर
तुम
लौट
भी
आए
मुहब्बत
अब
नहीं
होगी
मुझे
बर्बाद
करने
को
है
तेरा
इश्क़
ही
काफ़ी
मुझे
ग़ैरों
की
नफ़रत
की
ज़रूरत
अब
नहीं
होगी
त'अल्लुक़
टूटने
से
गर
नहीं
तुम
को
गिला
"जस्सर"
इधर
से
भी
मुहब्बत
की
हिफ़ाज़त
अब
नहीं
होगी
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Avtar Singh Jasser
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