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Avtar Singh Jasser
kuchh paudhe zyaada paani men kuchh kam men mar jaate hain
kuchh paudhe zyaada paani men kuchh kam men mar jaate hain | कुछ पौधे ज़्यादा पानी में कुछ कम में मर जाते हैं
- Avtar Singh Jasser
कुछ
पौधे
ज़्यादा
पानी
में
कुछ
कम
में
मर
जाते
हैं
और
जो
बच
जाएँ
पत्तझर
के
मौसम
में
मर
जाते
हैं
दुनिया
के
आगे
हम
ज़िन्दा
होते
हैं
बस
बाहरस
लेकिन
अपने
अंदर
अक्सर
हम
हम
में
मर
जाते
हैं
हम
तो
ख़ुद
को
खो
के
भी
ज़िन्दा
हैं
"जस्सर"
आज
तलक
वर्ना
लोग
किसी
को
खोने
के
ग़म
में
मर
जाते
हैं
- Avtar Singh Jasser
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कहीं
से
दुख
तो
कहीं
से
घुटन
उठा
लाए
कहाँ-कहाँ
से
न
दीवानापन
उठा
लाए
अजीब
ख़्वाब
था
देखा
के
दर-ब-दर
हो
कर
हम
अपने
मुल्क
से
अपना
वतन
उठा
लाए
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Farhat Abbas Shah
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मशहूर
भी
हैं
बदनाम
भी
हैं
ख़ुशियों
के
नए
पैग़ाम
भी
हैं
कुछ
ग़म
के
बड़े
इनाम
भी
हैं
पढ़िए
तो
कहानी
काम
की
है
Anjum Barabankvi
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मुझे
छोड़
दे
मेरे
हाल
पर
तिरा
क्या
भरोसा
है
चारा-गर
ये
तिरी
नवाज़िश-ए-मुख़्तसर
मेरा
दर्द
और
बढ़ा
न
दे
Shakeel Badayuni
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खुशियाँ
उसी
के
साथ
हैं
जो
ग़म
गुसार
है
ऐसे
हरेक
शख़्स
ही
दुनिया
का
यार
है
Sunny Seher
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वफ़ा
तुम
से
करेंगे
दुख
सहेंगे
नाज़
उठाएँगे
जिसे
आता
है
दिल
देना
उसे
हर
काम
आता
है
Arzoo Lakhnavi
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ज़िंदगी
क्या
किसी
मुफ़लिस
की
क़बा
है
जिस
में
हर
घड़ी
दर्द
के
पैवंद
लगे
जाते
हैं
Faiz Ahmad Faiz
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न
आया
ग़म
भी
मोहब्बत
में
साज़गार
मुझे
वो
ख़ुद
तड़प
गए
देखा
जो
बे-क़रार
मुझे
Asad Bhopali
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ज़ख़्म
दिल
पर
हज़ार
करता
है
और
कहता
है
प्यार
करता
है
दर्द
दिल
में
उतर
गया
कैसे
कोई
अपना
ही
वार
करता
है
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Santosh S Singh
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ये
ग़म
हमको
पत्थर
कर
देगा
इक
दिन
कोई
आ
कर
हमें
रुलाओ
पहले
तो
Siddharth Saaz
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कुल
जोड़
घटाकर
जो
ये
संसार
का
दुख
है
उतना
तो
मिरे
इक
दिल-ए-बेज़ार
का
दुख
है
शाइर
हैं
तो
दुनिया
से
अलग
थोड़ी
हैं
लोगों
सबकी
ही
तरह
हमपे
भी
घर
बार
का
दुख
है
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Ashutosh Vdyarthi
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सभी
मल्लाह
उतारे
जा
रहे
हैं
मुसाफ़िर
किस
किनारे
जा
रहे
हैं
तुम्हारा
कुछ
नहीं
जाएगा
इस
में
सभी
लेकिन
हमारे
जा
रहे
हैं
ज़रा
रोको
इन्हें
जाने
से
यारों
अँधेरों
में
सितारे
जा
रहे
हैं
तुम्हारे
साथ
देखो
जाने
वालो
सभी
दिलकश
नज़ारे
जा
रहे
हैं
ये
कश्ती
ग़र्क़
हो
जाएगी
जस्सर
कि
इस
के
सब
सहारे
जा
रहे
हैं
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Avtar Singh Jasser
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बाद
तेरे
आज
तक
ज़िन्दा
हूँ
मैं
इस
ख़ता
पे
यार
शर्मिंदा
हूँ
मैं
कल
तो
रौशन
था
मैं
तेरे
इश्क़
से
आज
तेरे
ग़म
से
ताबिंदा
हूँ
मैं
सब
की
ही
नज़रों
में
हूँ
बेरोज़गार
इश्क़
के
दफ़तर
में
कारिंदा
हूँ
मैं
इश्क़
ने
बेदखल
जब
से
कर
दिया
तब
से
तनहाई
का
बाशिंदा
हूँ
मैं
तुम
नहीं
जस्सर
उदासी
का
सबब
यूँँ
ही
ग़रक़
ए
फ़िक्र
ए
आइंदा
हूँ
मैं
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Avtar Singh Jasser
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कहाँ
तक
साथ
दोगी
तुम
हमारा
सनम
जावेदाँ
है
यह
ग़म
हमारा
Avtar Singh Jasser
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हर
इक
दर
पे
ही
सजदा
क्यूँ
करें
हम
कि
अपने
सर
को
सस्ता
क्यूँ
करें
हम
न
बन
पाए
जो
हिस्सा
ज़िंदगी
का
उसे
फिर
दिल
का
हिस्सा
क्यूँ
करें
हम
जहाँ
अहल
ए
ज़बान
ए
ख़ामोशी
हों
वहाँ
लफ़्ज़ों
को
ज़ाया'
क्यूँ
करें
हम
हक़ीक़त
में
नहीं
अपना
हुआ
जो
उसे
ख़्वाबों
में
अपना
क्यूँ
करें
हम
सज़ा
जिसकी
अभी
तक
मिल
रही
है
वही
ग़लती
दोबारा
क्यूँ
करें
हम
हमारे
पास
माचिस
ही
नहीं
है
तो
सूखे
बर्ग़
यकजा
क्यूँ
करें
हम
फ़क़त
इक
दोस्त
की
ख़ातिर
ऐ
'जस्सर'
अदू
सारा
ज़माना
क्यूँ
करें
हम
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Avtar Singh Jasser
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ख़ास
तो
कुछ
भी
नहीं
बदला
तुम्हारे
बाद
में
पहले
गुम
रहता
था
तुम
में,
अब
तुम्हारी
याद
में
मोल
हासिल
हो
गया
है
मुझको
इक-इक
शे'र
का
सब
दिलासे
दे
रहे
हैं
मुझको
"जस्सर"
दाद
में
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Avtar Singh Jasser
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