इससुकूत-ए-हिज्रमेंलगतीहैशहनाईग़ज़ल
इसफ़ितूर-ए-इश्क़मेंक्याक्यानकहलाईग़ज़ल
ख़ूब-सूरत,बाअदबऔरदिलनशींकिरदारकी
हू-ब-हूतुझसीसनमकलख़्वाबमेंआईग़ज़ल
कितनेसजदेकरलिएऔरकितनेरोज़ेरखलिए
तबकहींजाकेमुक़द्दरमेंमेरेआईग़ज़ल
ख़्वाबमेंभीख़्वाबतकहासिलनथाजिसकामुझे
उसबुलंदीतकहक़ीक़तमेंमुझेलाईग़ज़ल
कितनीकोशिशकररहाहूँ,कितनीकोशिशकरचुका
परअभीतकभीमुकम्मलहोनहींपाईग़ज़ल
सारेअफ़सानेपुरानेयादआनेलगगए
वक़्तनेकुछइसअदासआजदोहराईग़ज़ल
हमभलेउसगर्दिश-ए-दौराँजस्सरचुपरहे
परहमारेहौसलोंनेतोसदागाईग़ज़ल|