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Avtar Singh Jasser
badi mushkil se jeene ke saleeqe ham ko aa.e hain
badi mushkil se jeene ke saleeqe ham ko aa.e hain | बड़ी मुश्किल से जीने के सलीक़े हम को आए हैं
- Avtar Singh Jasser
बड़ी
मुश्किल
से
जीने
के
सलीक़े
हम
को
आए
हैं
कि
हम
ने
इक
तबस्सुम
में
हज़ारों
ग़म
छुपाए
हैं
कोई
हम
से
बड़ा
ताजिर
नहीं
होगा
ज़माने
में
वफ़ा
के
खोटे
सिक्के
इश्क़
में
हम
ने
चलाए
हैं
गिला
अपनी
तबाही
का
करें
किस
से
बता
'जस्सर'
मकाँ
हम
ने
समुंदर
के
किनारे
ख़ुद
बनाए
हैं
- Avtar Singh Jasser
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जलाने
वाले
जलाते
ही
हैं
चराग़
आख़िर
ये
क्या
कहा
कि
हवा
तेज़
है
ज़माने
की
Jameel Mazhari
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एक
ही
नदी
के
हैं
ये
दो
किनारे
दोस्तो
दोस्ताना
ज़िंदगी
से
मौत
से
यारी
रखो
Rahat Indori
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चल
दिए
घर
से
तो
घर
नहीं
देखा
करते
जाने
वाले
कभी
मुड़
कर
नहीं
देखा
करते
सीपियां
कौन
किनारे
से
उठा
कर
भागा
ऐसी
बाते
समुंदर
नहीं
देखा
करते
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Unknown
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ये
जो
है
फूल
हथेली
पे
इसे
फूल
न
जान
मेरा
दिल
जिस्म
से
बाहर
भी
तो
हो
सकता
है
Abbas Tabish
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काँटों
में
घिरे
फूल
को
चूम
आएगी
लेकिन
तितली
के
परों
को
कभी
छिलते
नहीं
देखा
Parveen Shakir
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उतरी
हुई
नदी
को
समुंदर
कहेगा
कौन
सत्तर
अगर
हैं
आप
बहत्तर
कहेगा
कौन
पपलू
से
उनकी
बीवी
ने
कल
रात
कह
दिया
मैं
देखती
हूँ
आपको
शौहर
कहेगा
कौन
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Paplu Lucknawi
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रो
रहा
था
गोद
में
अम्माँ
की
इक
तिफ़्ल-ए-हसीं
इस
तरह
पलकों
पे
आँसू
हो
रहे
थे
बे-क़रार
जैसे
दीवाली
की
शब
हल्की
हवा
के
सामने
गाँव
की
नीची
मुंडेरों
पर
चराग़ों
की
क़तार
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Ehsan Danish
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मैं
बाग़
में
जिस
जगह
खड़ा
हूँ
हर
फूल
से
काम
चल
रहा
है
Shaheen Abbas
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बहरस
ख़ारिज
हूँ
ये
मालूम
है
पर
तुम्हारी
ही
ग़ज़ल
का
शे'र
हूँ
Gyan Prakash Akul
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ये
हवा
सारे
चराग़ों
को
उड़ा
ले
जाएगी
रात
ढलने
तक
यहाँ
सब
कुछ
धुआँ
हो
जाएगा
Naseer Turabi
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शा'इरी
क्या
है
रदीफ़
ओ
क़ाफ़िया
क्या
च़ीज़
है
आप
ही
मुझको
बताएँ
मैं
अभी
बेबहर
हूँ
Avtar Singh Jasser
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एक
ग़ज़ल
माँ
मैंने
ऐसी
कह
दी
है
जो
तेरे
आँचल
के
जितनी
प्यारी
है
सर्दी
में
वो
धूप
लगे
हल्की-हल्की
पतझड़
में
वो
बिल्कुल
बारिश
जैसी
है
माँ
जिसको
सब
तेरे
जैसी
कहते
हैं
वो
तो
बस
इकलौती
तेरी
बेटी
है
उस
इन्साँ
को
ग़म
की
धूप
नहीं
लगती
जिसके
सर
पे
माँ
की
छाया
होती
है
'जस्सर'
सच्चा
प्यार
मिला
माँ
बाप
से
ही
बाक़ी
हर
इक
रिश्ता
दुनियादारी
है
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Avtar Singh Jasser
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मैं
तो
जस्सर
और
भी
रौशन
हुआ
जब
किसी
ने
भी
बुझाया
देर
तक
Avtar Singh Jasser
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सभी
मल्लाह
उतारे
जा
रहे
हैं
मुसाफ़िर
किस
किनारे
जा
रहे
हैं
तुम्हारा
कुछ
नहीं
जाएगा
इस
में
सभी
लेकिन
हमारे
जा
रहे
हैं
ज़रा
रोको
इन्हें
जाने
से
यारों
अँधेरों
में
सितारे
जा
रहे
हैं
तुम्हारे
साथ
देखो
जाने
वालो
सभी
दिलकश
नज़ारे
जा
रहे
हैं
ये
कश्ती
ग़र्क़
हो
जाएगी
जस्सर
कि
इस
के
सब
सहारे
जा
रहे
हैं
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Avtar Singh Jasser
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रहा
बाक़ी
कोई
भी
रास्ता
नईं
बहुत
मजबूर
हैं
हम
बे-वफ़ा
नईं
हज़ारों
ही
सफ़र
तय
कर
चुकी
वो
बिछड़
के
जिस
सेे
मैं
अब
तक
चला
नईं
तुम्हें
मिल
जाए
कोई
मुझ
सेे
बेहतर
यह
उसकी
बद्दुआ
ही
है,
दु'आ
नईं
किसी
का
मैं
न
हो
पाया
अभी
तक
किसी
से
इश्क़
उस
को
भी
हुआ
नईं
चिराग़
ए
दिल
बुझाया
उसने
ऐसा
किसी
से
आज
तक
रौशन
हुआ
नईं
हुदूद
ए
सब्र
वो
आँसू
बताए
जो
पलकों
के
किनारों
से
गिरा
नईं
मुसव्विर
ने
निगार
ए
ज़िन्दगी
में
कोई
भी
रंग
'जस्सर'
क्यूँ
भरा
नईं
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Avtar Singh Jasser
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