hijr | "हिज्र"

  - ABHISHEK RANJAN
"हिज्र"
चलोतुमछोड़करजाओयहाँसे
ज़रादेखूँकोईआयावहाँसे
यहीहैआख़िरीपैग़ामउसका
किसीक़ीमतमंज़िलसेमैंभटकूँ
तमन्नासाथकाकरतेहैंरबसे
मुझेरस्तादिखाओनातुममौला
महकउसइत्रकाअबतकभूला
लगाजोसामनेआईथीमेरी
मुझेबोलाकिसुनलेमुसाफ़िर
मिरादिलसाथलेजाओगेक्यातुम
लबोंसेयूँँतोवोकुछभीबोली
दिलोंकाखेलमानोचलरहाथा
दिलोंकेपासहीख़ंजरछुपाथा
हाँपागलथामुझकोक्यापताथा
समयआयाजहाँरस्ताअलगथा
मिराकमराथाउसकातोमहलथा
मिटाकेफ़ासलेकैसेबनाता
बता'रंजन'उसेदुल्हनबनाता
  - ABHISHEK RANJAN
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