फिरयादतेरीलाईहैमौसमबहारके
फूलोंपेचलरहाहूँमैंचप्पलउतारके
सहरापरस्तलोगथेमिट्टीकेओंठसे
मंज़रदिखारहेथेमुझेआबशारके
उठनेलगाहैपर्दातेरीकायनातका
खुलनेलगेहैंग़मभीसभीग़म-गुसारके
जोजारहाहैशख़्सयेहैशख़्सआख़री
बुझनेलगेंगेअबदिएमेरीमज़ारके
आशुफ़्तगीनिगलगईदुनियाकेसारेरंग
क़िस्सेसुनाहमेंतूकोईख़ुल्द-ज़ारके
ओसुनज़राअवेसओसय्यदअवेससुन
सदक़ेउतारदूँमैंतेरेपुर-वक़ारके