hidaayat ke li.e main kuchh bataana chahta hooñ sun | हिदायत के लिए मैं कुछ बताना चाहता हूँ सुन

  - Muhammad Asif Ali
हिदायतकेलिएमैंकुछबतानाचाहताहूँसुन
निज़ामतकेलिएमैंकुछसुनानाचाहताहूँसुन
पड़ेगीख़ाकमुँहपरऔरदामनचीख़जाएगा
नज़ाकतकेलिएमैंकुछदिखानाचाहताहूँसुन
सज़ादौर-ए-फ़लककीझेलनाबसमेंनहींतेरे
ख़यानतकेलिएमैंकुछजतानाचाहताहूँसुन
ज़मींकारंजभीबर्बादकरनाजानताहैअब
'अदावतकेलिएमैंकुछदयानाचाहताहूँसुन
निशाँयूँँज़ख़्मकादेदूँभलाकैसेतुझेमैंअब
फ़ज़ाओंकेलिएमैंकुछख़ज़ानाचाहताहूँसुन
सख़ावतभीदिखानीचाहिए'आसिफ़'कभीतुझको
ज़मानेकेलिएमैंकुछज़मानाचाहताहूँसुन
  - Muhammad Asif Ali
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy