so raha hai ghar sabhi ke khwaab aankhoñ dhal rahe hain | सो रहा है घर सभी के ख़्वाब आँखों ढल रहे हैं

  - Atul Maurya
सोरहाहैघरसभीकेख़्वाबआँखोंढलरहेहैं
एकहमहैंबारिशोंकेबादआँखेंमलरहेहैं
पूछमतवोकौनथेजोकरगएहैंमुझकोतन्हा
चंदासूरजथेवोमेरीआँखोंकेकाजलरहेहैं
'वाह','उम्दा'कहरहेहैंलोगजोयेमुस्कुराकर
होंयेशायरमगरयेइश्क़मेंघाइलरहेहैं
मैंनेउनलोगोंमेंहीअक्सरख़ुदाकोपालियाजो
काँपतीरूहोंकीख़ातिरजाड़ेकीकम्बलरहेहैं
मंज़िलेंहोचाहेजोभीवोहमेंअपनाहीलेंगी
हमकोचलनेसेहैमतलबचलनाहैसोचलरहेहैं
उनकोभीदेखा'अतुल'नेज़िन्दगीमेंफेलहोते
जोकिताबीइम्तिहानोंमेंसदाअव्वलरहेहैं
  - Atul Maurya
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