उम्र के आँगन में बेलें बन के फैला कोई ख़्वाब

  - Aslam Ansari
उम्रकेआँगनमेंबेलेंबनकेफैलाकोईख़्वाब
जैसेजीनेकेलिएकाफ़ीहोतन्हाकोईख़्वाब
सोचिएक्यामौज-ए-गुलसेभीकोईलबतरहुआ
देखिएसाहिलपेरहजाएप्यासाकोईख़्वाब
रंग-ओ-सूरतदोअलगशख़्सिय्यतेंहैंइसलिए
दोनोंकहतेहैंहमेंदीजेहमाराकोईख़्वाब
वाहिमोंकीज़दसेबचनेकोसफ़रजारीरखो
तुमज़राठहरेकिसायाबनकेउलझाकोईख़्वाब
फिरधड़कतेहैंदिल-ए-इंसाँमेंफ़र्दाकेख़याल
फिरहवाओंनेज़मींपरलाउताराकोईख़्वाब
उसकोख़्वाबोंसेज़ियादारत-जगोंकाशौक़था
उसकीपलकोंपरइसीबाइ'सेठहराकोईख़्वाब
संग-पारोंकीज़बाँहोतीतोशायदमाँगते
कोईचेहराकोईपैकरकोईशो'लाकोईख़्वाब
क्यातमाशा-गाहमेंउसकेलिएमंज़रथे
याउसेमसरूफ़रखताहैउसीकाकोईख़्वाब
शोर-ए-दुनियामेंसिसकतीहैसदा-ए-दिलकहीं
ज़िंदगीतश्कीलदेनग़्मातजैसाकोईख़्वाब
  - Aslam Ansari
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy