रास्तासुनसानथातोमुड़केदेखाक्यूँँनहीं
मुझकोतन्हादेखकरउसनेपुकाराक्यूँँनहीं
धूपकीआग़ोशमेंलेटारहामैंउम्रभर
मेहरबाँथावोतोमिस्ल-ए-अब्रआयाक्यूँँनहीं
एकपंछीदेरतकसाहिलपेमंडलातारहा
मुज़्तरिबथाप्याससेलेकिनवोउतराक्यूँँनहीं
क़ुर्बकीक़ौस-ए-क़ुज़हकमरेमेंबिखरीथीमगर
रातभररंग-ए-तमन्नाफिरभीनिखराक्यूँँनहीं
मुझकोपत्थरमेंबदलतेचाहेख़ुदबनजातेवोमोम
ख़्वाहिश-ए-तिफ़्ल-ए-तमन्नाकोजगायाक्यूँँनहीं
उसकोतन्हापाके'असलम'रातअपनेरूममें
क़तरा-ए-ख़ून-ए-हवसआँखोंमेंआयाक्यूँँनहीं